Thursday , 20 June 2019
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Tag Archives: praacheen bhaarat

कलिंग युद्ध

वास्तव में अशोक के पिता तथा दादा ही अपने राज्य की सीमाओं का पर्याप्त विस्तार कर गये थे , इसलिए अशोक को अधिक युद्ध नहीं करने पड़े । चन्द्रगुप्त तथा बिन्दुसार ने लगभग सारे उत्तर भारत पर अपना अधिकार कर रखा था । शिलालेख XIII में बताया गया है कि अशोक ने केवल कलिंग को विजय किया था । यह …

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अशोक का प्रारम्भिक जीवन

अशोक का प्रारम्भिक जीवन इतिहास ऐसे अनेकों राजाओं के विवरण से भरा पड़ा है जिन्होंने साम्राज्य विस्तार की लालसा में अंधे हो खून की होली खेली और अपनी विजयों पर ठहाके पर ठहाके लगाए । उनका पत्थर दिल युद्ध – भूमि के घिनौने दृश्यों , मासूम अनाथ बच्चों की चीखों , विधवाओं के विलाप तथा बेसहारा माताओं तथा बहिनों के …

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बोद्ध धर्म और जैन धर्म में असमानताएं

असमानताएं ( Points of Differences ) उपरोक्त समानताओं से यह भाव कदापि स्वीकार्य नहीं होना चाहिए कि इन धर्मों में कोई मतभेद नहीं है । यदि ऐसा होता तो इन दो धर्मों की आवश्यकता ही क्या थी एक ही धर्म पर्याप्त था । बोद्ध धर्म और जैन धर्म में असमानताएं निम्नलिखित हैं :- कठिन तपस्या और मध्यम मार्ग ( Hard Self …

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बोद्ध धर्म और जैन धर्म में समानताएं

समानताएं ( Points of Agreement ) इतिहास साक्षी है कि इन दोनों धर्मों का जन्म एक ही समय और समान परिस्थितियों में हुआ है । ये दोनों धर्म वास्तव में छठी सदी ईस्वी पूर्व में हिन्दू धर्म की बुराइयों और दोषों के कारण पैदा हुए हैं । इन धर्मों के साथ जन – साधारण के धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ । हिन्दू …

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महात्मा बुद्ध की शिक्षा

महात्मा बुद्ध की शिक्षा के मुख्य सिद्धान्त निम्नलिखित हैं : – चार आदर्श और अष्टमार्ग ( Four noble Truths and noble Eight old Path ) महात्मा बुद्ध की शिक्षा के चार प्रदर्श सिद्धान्त हैं :- संसार दुःखों और कष्टों का घर है । डॉ० राधा कृष्णन् ने अपनी पुस्तक ‘ Indian Philosophy ‘ में लिखा है , ” Birth is …

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हीनयान और महायान में अंतर

हीनयान और महायान में अंतर महात्मा बुद्ध की मृत्यु के बाद बौद्ध भिक्षुओं ने बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों की व्याख्या अपनी इच्छानुसार करनी प्रारम्भ कर दी । इस प्रकार रीति – रिवाजों और संस्कारों का जन्म हुआ जिसका परिणाम यह हुआ कि कनिष्क के समय में इसके दो सम्प्रदाय हो गए । हीनयान बौद्ध धर्म के उस मूल रूप को …

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अकाल नीति

अकाल नीति 1769 से 1770 ई . के बीच पड़े भीषण अकाल ने बंगाल की एक – तिहाई जनसंख्या को कालकलवित कर दिया । मगर कम्पनी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया . हालाँकि कम्पनी ने 1860 ई . में दिल्ली के आस – पास के क्षेत्रों में पटने वाले अकाल की जाँच के लिए स्मिथ समिति की नियुक्ति …

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