Monday , 20 May 2019
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Tag Archives: itihaas

कलिंग युद्ध

वास्तव में अशोक के पिता तथा दादा ही अपने राज्य की सीमाओं का पर्याप्त विस्तार कर गये थे , इसलिए अशोक को अधिक युद्ध नहीं करने पड़े । चन्द्रगुप्त तथा बिन्दुसार ने लगभग सारे उत्तर भारत पर अपना अधिकार कर रखा था । शिलालेख XIII में बताया गया है कि अशोक ने केवल कलिंग को विजय किया था । यह …

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अशोक का प्रारम्भिक जीवन

अशोक का प्रारम्भिक जीवन इतिहास ऐसे अनेकों राजाओं के विवरण से भरा पड़ा है जिन्होंने साम्राज्य विस्तार की लालसा में अंधे हो खून की होली खेली और अपनी विजयों पर ठहाके पर ठहाके लगाए । उनका पत्थर दिल युद्ध – भूमि के घिनौने दृश्यों , मासूम अनाथ बच्चों की चीखों , विधवाओं के विलाप तथा बेसहारा माताओं तथा बहिनों के …

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चन्द्रगुप्त मौर्य का चरित्र और उसके कार्य

चन्द्रगुप्त मौर्य का चरित्र ( Character of Chandra Gupta Maurya ) चन्द्रगुप्त की निस्सन्देह भारत के महान् राजनैतिक प्रशासकों में गणना होती है । उसे प्रथम भारतीय राष्ट्रीय सम्राट भी कह सकते हैं , जिससे इतिहास में उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है । उससे पूर्व भारत कई छोटी – छोटी रियासतों में बंटा हुआ था , जिन पर विदेशी …

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चन्द्रगुप्त की विजयें

चन्द्रगुप्त की विजयें पंजाब की विजय ( Conquest of Punjab ) चन्द्रगुप्त की सिकन्दर , से भेंट हुई , परन्तु उससे चन्द्रगुप्त को कुछ न मिला फिर विष्णुगुप्त कौटिल्य ( चाणक्य ) के साथ चन्द्रगुप्त ने एक योजना बनाई । चाणक्य भी नन्द वंश का नाश करना चाहता था और चन्द्रगुप्त तो उसका शत्रु था ही । साथ ही सिकन्दर …

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र

कौटिल्य का अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र के लेखक चाणक्य हैं । यह पुस्तक मौर्य काल के इतिहास के लिए दूसरा स्रोत है । चाणक्य को विष्णु गुप्त भी कहा जाता है । कौटिल्य तो उसे उसकी पुस्तक ‘ अर्थशास्त्र ‘ के कारण कहा जाता है क्योंकि इस पुस्तक में राजाओं के लिए कुटिल नीति पर बहुत से उत्तम सिद्धान्त दिए गए हैं । …

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मेगस्थनीज की पुस्तक इंडिका

मेगस्थनीज की पुस्तक इंडिका मौर्य वंश के विषय में सर्वप्रथम हमें मेगस्थनीज की पुस्तक ‘ इंडिका ‘ से ज्ञान प्राप्त होता है । मेगस्थनीज सिकन्दर के उत्तराधिकारी सैल्यूकस निकेटोर ( Seleukus Necator ) की ओर से चन्द्रगुप्त के दरबार में एक राजदूत के रूप में आया था । यह माना जाता है कि वह चन्द्रगुप्त की राजधानी पाटलीपुत्र में कोई पांच …

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मुहम्मद तुगलक की कल्पित योजनाएं

गयासुद्दीन की मुत्यु के पश्चात् 1325 ई० में उसका पुत्र जूना खां सिंहासन पर बैठा । उसने मुहम्मद की उपाधि ग्रहण की । इतिहास में उसे मुहम्मद तुगलक के नाम से जाना जाता है । मुहम्मद तुगलक का इतिहास में विशेष स्थान है । वह बहुत विद्वान् , दानी , कवि तथा नई योजनाएं बनाने में सिद्धहस्त था । परन्तु उसके …

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