Friday , 24 May 2019
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न्यूटन के गति के विषयक नियम

न्यूटन का गति का प्रथम नियम ( Newton ‘ s First Law of Motion )

यदि कोई वस्तु दिराम अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में हो रहेगी और यदि वह क समन दल से सीधी रेखा में चल रही है , तो वह वैसे ही चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन न किया जाए । इसे गैलीलियो का नियम या  जडत्व का नियम ( Law of Interia ) भी कहते हैं ।

उदाहरण

ठहरी हुई मोटर या रेलगाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उसमें बैठे यात्री पीछे की ओर गिर पड़ते है क्योकि यात्रियों के शरीर का निचला भाग गाड़ी के साथ चलने लगता है परन्तु शरीर का ऊपर वाला भाग जड़त्व के कारण विरामावस्था में ही बना रहता है ।

न्यूटन का गति का द्वितीय नियम ( Newton ‘ s Second Law of Motion )

किसी वस्तु के सवेग – परिवर्तन की दर उस वस्त पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है तथा संवेग परिवर्तन आरोपित बल की दिशा में भी होता है ।

बल = द्रव्यमान x त्वरण

F = a

उदाहरण

क्रिकेट खिलाड़ी तेजी से आती हुई गेंद को कैच करते समय अपने हाथों को गेंद के वेग की दिशा में गतिमान कर लेता है ताकि चोट कम लगे ।

न्यूटन का गति का तृतीय नियम ( Newton ‘ s Third Law of Motion )

“ प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया विपरीत दिशा में होती है । ” इसे क्रिया – प्रतिक्रिया का नियम भी कहा जाता है ।

उदाहरण

बन्दूक से गोली चलाने वाले को पीछे की ओर धक्का लगना ।

संवेग संरक्षण का नियम ( Law of Conservation of Momentum )

“ यदि कणों के किसी समूह या निकाय पर कोई बाह्य बल नहीं लग रहा है , तो उस निकाय का कुल संवेग नियत रहता है अर्थात् टक्कर के पहले और बाद का संवेग बराबर होता है । इस कथन को ही संवेग संरक्षण का नियम कहते हैं ।

बल का आवेग ( Impluse of Force )

जब कोई बड़ा बल किसी वस्तु पर थोड़े समय के लिए कार्य करता है , तो बल तथा समय अन्तराल के गुणनफल को उस बल का आवेग कहते हैं ।

आवेग = बल x समय अन्तराल = संवेग परिवर्तन

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