Wednesday , 24 July 2019

सन्तुलन

सन्तुलन

कोई पिण्ड तब सन्तुलन में कहा जाता है , जब इस पर लगने वाले बलों तथा बल आघूर्णों का परिणामी क्रमशः शून्य होता है ।

सन्तुलन के प्रकार (Type of Equilibrium)

सन्तुलन तीन प्रकार के होते हैं ।

स्थायी सन्तुलन यदि किसी वस्तु को उसको सन्तुलनावस्था से थोड़ा – सा विस्थापित करके छोड़ने पर यदि वस्तु पुनः अपनी सन्तुलन की अवस्था को प्राप्त कर लेती है , तो इसे स्थायी सन्तुलन ( Stable Equilibrium ) कहते हैं । पीसा की ऐतिहासिक मीनार का आधार क्षेत्रफल बड़ा है , इसलिए मीनार के गुरुत्व केन्द्र से होकर जाने वाली भार की ऊध्र्वाधर रेखा उसके आधार से गुजरती है । अत : इसका सन्तुलन बना रहता है ।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम

स्थायी सन्तुलन की शर्ते किसी वस्तु को स्थायी सन्तुलन में बने रहने के लिए , निम्नलिखित शतों को पूरा करना अनिवार्य है

  • वस्तु का गुरुत्व केन्द्र अधिक से अधिक नीचा होना चाहिए ।
  • गुरुत्व केन्द्र से होकर जाने वाली ऊर्ध्वाधर रेखा वस्तु के आधार से होकर गुजरनी चाहिए । इसलिए पहाड़ पर चढ़ते समय अथवा अपनी पीठ पर भारी बोझ लेकर चलने वाला मनुष्य आगे की ओर झुक जाता है , क्योंकि इस अवस्था में उसके गुरुत्व केन्द्र से होकर जाने वाली ऊर्ध्वाधर रेखा उसके पैरों के पास धरातल से होकर जाती हैं ।

अस्थायी सन्तुलन यदि किसी वस्तु को उसकी सन्तुलनावस्था से थोड़ा – सा विस्थापित करके छोड़ने पर वह पुनः सन्तुलन की अवस्था में न आए , तो इसे अस्थायी सन्तुलन ( Unstable Equilibrium ) कहते हैं ।

उदासीन सन्तुलन यदि किसी वस्तु को उसकी सन्तुलन स्थिति से थोड़ा विस्थापित करके छोड़ने पर वह वस्तु अपनी पूर्व अवस्था में आने का प्रयास न करे बल्कि अपनी नई अवस्था में ही सन्तुलित हो जाए , तो कह सकते हैं कि वस्तु उदासीन सन्तुलन ( Neutral Equilibrium ) में है ।

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