Friday , 24 May 2019
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स्थिर विद्युत

स्थिर विद्युत ( Static Electricity )
पदार्थों को परस्पर रगड़ने से उस पर जो आवेश की मात्रा संचित रहती है , उसे स्थिर विद्युत कहते हैं । स्थिर विद्युत में आवेश स्थिर रहता है ।

चालक ( Conductor )
जिन पदार्थों से होकर विद्युत् आवेश सरलता से प्रवाहित होता है , उन्हें चालक कहते हैं । जैसे – चाँदी , ताँबा , एल्युमिनियम आदि । चाँदी सबसे अच्छा चालक है । दूसरा स्थान ताँबा का है ।

अचालक ( Non – Conductors )
वे पदार्थ जिनमें अपेक्षाकृत बहुत कम मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं । अचालक या कुचालक या विद्युतरोधी कहलाते हैं । इनमें विद्युत चालन सम्भव नहीं होता है । लकड़ी , रबर , कागज , अभ्रक , शुद्ध आसुत जल आदि अचालक पदार्थों के उदाहरण हैं ।

विद्युत क्षेत्र ( Electric field )
किसी आवेश या आवेशित वस्तु के चारों ओर का स्थान जहाँ तक उसके प्रभाव का अनुभव किया जा सके , विद्युत् क्षेत्र कहलाता है ।

विद्युत धारा क्या है ?

विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ( Intensity of Electric Field )
विद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु पर स्थित धनात्मक आवेश जितने बल का अनुभव करता है , उसे उस बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता अथवा विद्युत क्षेत्र कहते हैं । ‘ विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ‘ को न्यूटन / कूलॉम में व्यक्त करते हैं तथा यह सदिश राशि है ।

विद्युत विभव ( Electric Potential )
इकाई धनात्मक आवेश को अनन्त से विद्युत क्षेत्र के किसी बिन्दु तक लाने के लिए , बाह्य बल द्वारा किए गए कार्य को , उस बिन्दु का विद्युत विभव ( Electric Potential ) कहते हैं । विद्युत विभव एक अदिश राशि है ।

विभवांतर ( Potential Difference )
विद्युतीय क्षेत्र के दो बिन्दुओं के विभव के अन्तर को इन बिन्दुओं के बीच का विभवान्तर ( Potential Difference ) कहते हैं । किसी स्थान पर जहाँ विद्युत क्षेत्र शून्य है वहाँ विद्युत विभव नहीं हो सकता है , परन्तु जहाँ विद्युत विभव शून्य है , वहाँ विद्युत क्षेत्र हो सकता है ।

विद्युत सेल ( Electric cell )
यह मुख्यतः दो प्रकार के होते है-

प्राथमिक सेल ( Primary Cell )
इन सेलों द्वारा रासायनिक ऊर्जा सीधे ही विद्युत ऊर्जा में बदलती है तथा इन्हें पुन : आवेशित नहीं किया जा सकता है ; जैसे — शुष्क सेल , लेक्लांशे सेल आदि ।

द्वितीयक सेल ( Secondary Cell )
इन सेलों को आवेशित करके रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है तथा इन सेलों को पुनः आवेशित किया जा सकता है और बार – बार उपयोग में लाया जा सकता है ; जैसे — सीसा संचायक सेल , क्षारीय संचायक सेल आदि ।

विद्युत धारिता ( Electric Capacity )
किसी चालक की धारिता ( C ) चालक को दिये गये आवेश ( Q ) तथा उसके कारण चालक के विभव में होने वाले परिवर्तन ( V ) के अनुपात (Ratio) को कहते हैं ।
C = QV
धारिता का SI मात्रक फैराडे ( F ) होता है ।

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