Tuesday , 16 July 2019

दुरी एवं विस्थापन

दुरी एवं विस्थापन

किसी गतिमान कण या वस्तु द्वारा किसी मार्ग पर चली गई कुल लम्बाई को कण या वस्तु द्वारा चली गई दूरी ( Distance ) कहते हैं , जबकि कण की अन्तिम स्थिति तथा प्रारम्भिक स्थिति के अन्तर को कण का विस्थापन ( Displacement ) कहते हैं ।

दुरी एवं विस्थापन

चित्र में प्रदर्शित AB ( A से B तक ) विस्थापन है , जहाँ AB ( वक्र पथ ) , किसी वस्तु द्वारा A से B तक पहुँचने के क्रम में चली गई दूरी को निर्दिष्ट करता है । यहाँ , AB एक सदिश तथा AB एक अदिश को दर्शाते हैं ।

दूरी = चाल x समय

तथा

विस्थापन = वेग x समय

उत्तोलक (Lever)

दूरी अदिश राशि है , जबकि विस्थापन सदिश राशि है । SI पद्धति में दोनों राशियों का मात्रक ‘ मीटर होता है । दूरी सदैव धनात्मक या शून्य हो सकती है , जबकि कण का विस्थापन शून्य , धनात्मक या ऋणात्मक भी हो सकता है । गतिमान कण के लिए दूरी , समय के साथ कभी नहीं घट सकती , जबकि विस्थापन समय के साथ घट सकता है ।

नोट दूरी के मापन के लिए ओडोमीटर ( Odometer ) का प्रयोग किया जाता है ।

महत्त्वपूर्ण बिन्दु

  1. किसी सरल रेखा में गतिमान वस्तु के कोणीय वेग सम्भव हो सकते हैं , परन्तु इसकी कुछ विशेष परिस्थितियाँ हैं ।
  2. रेखीय तथा कोणीय दोनों ही प्रकार की गतियाँ समरूप तथा असमरूप हो सकती हैं ।
  3. यदि कोई वस्तु समान समय में एक निश्चित कोण से समान दूरी से विस्थापित होती है , तो इसकी गतियाँ क्रमशः समरूप रेखीय गति या समरूप कोणीय गति कहलाएँगी तथा इसके प्रतिकूल असमरूप गतियाँ कहलाएँगी ।

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