Wednesday , 24 July 2019

परमाणु भौतिकी

परमाणु भौतिकी

नाभिकीय भौतिकी में परमाणवीय नाभिक का अध्ययन किया जाता है । परमाणु के नाभिक का व्यास 10 – 15 मीटर , 10 – 14 मीटर की कोटि का होता है , जबकि परमाणु का व्यास 10 – 10 मीटर होता है । नाभिक में प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन कण होते हैं । नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को परमाणु क्रमांक कहते हैं तथा इसे Z द्वारा प्रकट करते हैं ।

परमाणु ( Atom )

परमाणु वे सूक्ष्मतम कण हैं , जो रासायनिक क्रिया में भाग ले सकते हैं , परन्तु स्वतंत्र अवस्था में नहीं रहते । परमाणु मुख्यतः तीन मूल कणों इलेक्ट्रॉन , प्रोटॉन व न्यूट्रॉन से मिलकर बना होता है । परमाणु के केन्द्र में एक नाभिक होता है , जिसमें प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन रहते हैं , इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं । परमाणु में प्रोटॉन एवं इलेक्ट्रॉन की संख्या समान एवं आवेश विपरीत होते हैं , जिसके कारण यह उदासीन होता है ।

स्थिर विद्युत क्या है ?

पदार्थ के मूल कण ( Elementary Particles of Matter )

कण द्रव्यमान (किग्रा) आवेश () खोजकर्ता
प्रोटोन 1.672 x 10-27 +1.6 x 10-19 गोल्डस्टीन
न्यूट्रान 1.675 x 10-27 0 चैडविक
इलेक्ट्रान 9.108 x 10-31 -1.6 x 10-19 जे. जे. थामसन

नाभिकीय संलयन ( Nuclear Fusion )

नाभिकीय संलयन ( Nuclear Fusion ) में दो हल्के नाभिक परस्पर संयुक्त होकर अपेक्षाकृत एक भारी नाभिक की रचना करते हैं । इस प्रक्रिया से प्राप्त भारी नाभिक का द्रव्यमान , संयोग करने वाले दोनों नाभिकों के द्रव्यमान के योग से कम होता है ।

एक नाभिकीय संलयन अभ का उदाहरण है-

सूर्य एवं तारो से प्राप्त उर्जा एवं प्रकाश का स्त्रोत नाभिकीय संलयन ही है. नाभिकों को सन्ल्यित करने के लिए करीब 108 केल्विन के उच्च ताप तथा अत्यन्त उच्च दाब की आवश्यकता होती है।

हाइड्रोजन बम ( Hydrogen Bomb )
हाइड्रोजन बम का आविष्कार अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 1952 ई . में किया । यह नाभिकीय संलयन ( fusion ) पर आधारित है । यह बम परमाणु बम की अपेक्षा 1 , 000 गुना अधिक शक्तिशाली होता है ।

नाभिकीय विखंडन ( Nuclear Fission )
वह नाभिकीय प्रतिक्रिया जिसमें कोई एक भारी नाभिक दो भागों में टूटता है , नाभिकीय विखण्डन कहलाता है । विखण्डन के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं । सबसे पहले नाभिकीय विखंडन ( fission ) अमेरिकी वैज्ञानिक स्ट्रासमैन एवं हॉन के द्वारा दिखाया गया । इन्होंने जब यूरेनियम – 235 पर न्यूट्रॉनों की बमबारी की तो पाया कि यूरेनियम के नाभिक दो खण्डों में विभाजित हो जाते हैं ।

 

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