Monday , 22 July 2019

ध्वनि तरंग

ध्वनि तरंग ( Sound Wave )

जिन यांत्रिक तरंगों ( Mechanical Waves ) की आवृत्ति ( Frequency ) लगभग 20 हर्ट्ज ( Hz ) से 20 किलो हर्ट्ज ( KHz ) के बीच होती है , हम उन्हें ध्वनि ( Sound ) की संज्ञा से अभिहित करते हैं । ध्वनि एक अनुदैर्घ्य ( Longitudinal ) तरंग है , ध्वनि वेग का सबसे अधिक ठोस में , फिर द्रव में तथा सबसे कम गैस में होता है ।

ध्वनि तरंग की विशेषताएँ ( Properties of Sound Waves )

  • परावर्तन ( Reflection )
  • प्रतिध्वनि ( Echo )
  • अपवर्तन ( Refraction )
  • अनुनाद ( Resonance )
  • विवर्तन ( Diffraction )
  • तारत्व ( Pitch )
  • गुणता ( Quality )

अवश्रव्य तरंगे ( Infrasonic Waves )
20 Hz से नीचे की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को ‘ अवश्रव्य तरंगें ‘ कहते हैं । इसे हमारा कान सुन नहीं सकता है । इस प्रकार की तरंगों को बहुत बड़े आकार के स्रोतों से उत्पन्न किया जा सकता है ।

श्रव्य तरंगें ( Audible Waves )
20Hz से 20 , 000 Hz के बीच की आवृत्ति वाली तरंगों को ‘ श्रव्य तरंग ‘ कहते हैं । इन तरंगों को हमारा कान सुन सकता है ।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम

पराश्रव्य तरंगें ( Ultrasonic Waves )
20000 Hz से अधिक आवृत्ति की तरंगें पराश्रव्य तरंगें कहलाती हैं । ये तरंगें मनुष्य द्वारा सुनी नहीं जा सकती हैं । परन्तु कुछ जानवर जैसे – कुत्ता , बिल्ली , चमगादड़ आदि इन्हें सुन सकते हैं ।

पराश्रव्य तरंगों के उपयोग :
1 . संकेत भेजने में
2 . समुद्र की गहराई का पता लगाने में
3 . कीमती कपड़ों , वायुयान तथा घड़ियों के पुर्जी को साफ करने में
4 कल – कारखानों की चिमनियों से कालिख हटाने में
5 . दूध के अन्दर के हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में
6 . गठिया रोग के उपचार एवं मस्तिष्क के ट्यूमर का पता लगाने में ।

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