Monday , 22 July 2019
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केप्लर के ग्रहीय गति के नियम

केप्लर के ग्रहीय गति के नियम

केप्लर ने सूर्य की परिक्रमा करने वाले ग्रहों की गति के सम्बन्ध में निम्नलिखित तीन नियम प्रतिपादित किए , जिन्हें ग्रहों की गति के केप्लर के नियम कहा जाता है । इस सन्दर्भ में केप्लर के तीन नियम हैं ।

कक्षाओं का नियम ( Law of Orbits )
प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार ( elliptical ) कक्षा में । परिक्रमा करता है तथा सूर्य ग्रह की कक्षा के एक फोकस बिन्दु पर स्थित होता है ।

ध्वनि तरंगें

क्षेत्रीय चाल का नियम ( Law of Areal Velocity )
प्रत्येक ग्रह की क्षेत्रीय चाल नियत रहती है अर्थात् सूर्य से ग्रह को मिलाने वाली रेखा बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल तय ( Sweep ) करती है ।

परिक्रमण कालों का नियम ( Law of Time Periods )
सूर्य के चारों ओर किसी ग्रह द्वारा एक पुरा चक्कर लगाने में लगा समय अर्थात् ग्रह का सूर्य के परितः परिक्रमण काल T का वर्ग , उसकी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के अर्द्ध – दीर्घाक्ष ( Semi – major Axis ) a , की तृतीय घात के अनुक्रमानुपाती होता है । अर्थात् Law of time period

उपग्रह ( Satellite )

किसी ग्रह के चारों ओर परिक्रमा करने वाले । पिंड को उस ग्रह का उपग्रह कहते हैं । जैसे – चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है ।

उपग्रह का कक्षीय चाल ( Orbital Speed of a Satellite )
उपग्रह की कक्षीय चाल उसकी पृथ्वी तल से ऊँचाई पर निर्भर करती है । उपग्रह पृथ्वी तल से जितना अधिक दूर होगा , उतनी ही उसकी चाल कम होगी ।

उपग्रह की कक्षीय चाले उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती है । एक ही त्रिज्या के कक्षा में भिन्न – भिन्न द्रव्यमानों के उपग्रहों की चाल समान होगी ।

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