Tuesday , 16 July 2019

ऊष्मा इंजन

ऊष्मा इंजन

वह युक्ति जिसके द्वारा ऊष्मा का यान्त्रिक कार्य में रूपान्तरण किया जा सकता है , ऊष्मा – इंजन ( Heat Engine ) कहलाती है । इसके मुख्य रूप से तीन भाग होते हैं ऊष्मा का स्रोत ( Source of Heat ) इंजन में किसी भी प्रकार के ईंधन को जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जा सकती है ; जैसे — मोटर के इंजन में पेट्रोल जलाकर तथा भाप – रेल के इंजन में कोयला जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जा सकती है ।

विशिष्ट ऊष्मा

ऊष्मा इंजन के प्रकार भी इजन दो प्रकार के होते हैं –
1 . बाह्य दहन इंजन ( External Combustion Engine ) इस प्रकार के इंजन में सिलिण्डर के बाहर ईंधन ; जैसे — कोयला अथवा लकड़ी , को जलाकर पानी को भाप बनाते हैं और उस भाप को नियन्त्रित करके इंजन के सिलिण्डर में भेजते हैं । तथा उसके द्वारा कार्य किया जाता है ; जैसे — भाप इंजन एक बाह्य दहन इंजन है ।
2 . आन्तरिक दहन इंजन ( Internal Combustion Engine ) इस प्रकार के इंजन में सिलिण्डर के अन्दर ईंधन ; जैसे – तेल , पेट्रोल अथवा गैस , को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न की जाती है और इस ऊष्मा से कार्य प्राप्त किया जाता है ; जैसे — पेट्रोल अथवा गैस इंजन आन्तरिक दहन इंजन हैं । आजकल पेट्रोल इंजन एक अधिक प्रचलित प्रकार का इंजन है , जिसके प्रयोग से मोटरकार , हवाई जहाज इत्यादि चलाए जाते हैं ।

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