Monday , 22 July 2019

ऊष्मा ( Heat )

ऊष्मा

ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है , जो दो वस्तुओं के बीच तापान्तर के कारण उच्चतर ताप की वस्तु से निम्नतर ताप की वस्तु की ओर स्थानान्तरित होती है । ऊर्जा का यह स्थानान्तरण जब तक दोनों वस्तुओं के ताप समान न हो जाए । कार्य तथा ऊष्मा दोनों ही ऊर्जा के रूप हैं ।

ऊष्मा के मात्रक
अन्तर्राष्ट्रीय SI पद्धति में ऊष्मा का मात्रक जूल है , किन्तु इसके लिए निम्न मात्रक का प्रयोग किया जाता है :-
1 . कैलोरी ( Calorie ) :
एक ग्राम जल का ताप 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को कैलोरी कहते हैं ।
2 . अन्तर्राष्ट्रीय कैलोरी ( International Calorie ) :
1 ग्राम शुद्ध जल का ताप 14 . 5°C से 15 . 5°C तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को 1 कैलोरी कहा जाता है ।
3 . ब्रिटिश थर्मल यूनिट ( B . Th . U . ) :
एक प्रौड जल का ताप 1°F बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को 1 B . Th . U . कहते हैं ।

न्युटन के प्रथम नियम के उदाहरण

ताप

ताप वह भौतिक कारक है जो एक वस्तु से दूसरी वस्तु में ऊष्मीय ऊर्जा के प्रवाह की दिशा निश्चित करता है । ताप एक अदिश राशि है जिसका SI मात्रक केल्विन(K) है।
ताप मापने के पैमाने :
ताप मापने के लिए निम्न प्रकार के पैमाने प्रचलित हैं ।

तापमापी हिमांक क्व्थनांक
सेल्सियस 0 100
फारेनहाइट 32०` 212
केल्विन 273 373
रियूमर 0 80

चारों पैमानों में समबन्ध

विशिष्ट ऊष्मा ( Specific Heat )
किसी पदार्थ के एकांक द्रव्यमान का ताप 1C बढ़ाने के लिए आवश्यकऊष्मा की मात्रा को पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा ( Specific Heat ) कहते है ।

Check Also

जल के गुण

जल एक रसायनिक पदार्थ है जिसका रसायनिक सूत्र H2O है: जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन के परमाणु सहसंयोजक बंध के द्वारा एक ऑक्सीजन के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *