Monday , 22 July 2019

परमाणु नाभिक

 

परमाणु नाभिक

1911 ई० में रदरफोर्ड ने परमाणु नाभिक की खोज की । 1911 ई० में रदरफोर्ड ने प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया कि ,

( i ) परमाणु का समस्त धन आवेश तथा लगभग सम्पूर्ण भार उसके केन्द्रीय भाग में स्थित होता है ।

( ii ) नाभिक का व्यास परमाणु के व्यास से बहुत ही छोटा होता है ( परमाणु के व्यास का लगभग 1/10000 ) इसलिए शेष भाग खोखला होता है ।
नाभिक का आयतन परमाणु के कुल आयतन का वां अंश है । चूंकि इतने छोटे – से नाभिक में परमाणु का समस्त भार समाया रहता है , इसलिए नाभिक का घनत्व बहुत ही अधिक होता है । यदि नाभिकों को मिलाकर एक घनसेंटीटीमीटर का पिण्ड बना ले तो उसका भार लगभग 5 करोड़ टन होगा।

परमाणु क्या है ?

( iii ) नाभिक से कोई इलेक्ट्रॉन नहीं होता और वह सदैव धनात्मक आविष्ट होता है । यह धनात्मक आवेश इलेक्ट्रानों के ऋणात्मक आवेश द्वारा सन्तुलित हो जाता है । ये इलेक्ट्रॉन नाभिक से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर नाभिक के चारों ओर निश्चित बन्द अण्डाकार कक्षाओं में घूमते हैं । इस गति के कारण ही एक इलेक्ट्रॉन नाभिक में खिंच जाने से बच जाता है क्योंकि अपकेन्द्री ( centrifugal ) शक्ति नाभिक की अभिकेन्द्री ( centripetal ) आकर्षण शक्ति के विपरीत परन्तु बराबर होती है ।

जिस प्रकार ग्रह सूर्य के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं उसी प्रकार इलेक्ट्रॉन भी नाभिक के गिर्द चक्कर काटते रहते हैं । इसी कारण इन इलैक्ट्रानों को नक्षत्रीय इलेक्ट्रॉन ( planetary electrons ) कहते हैं ।

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