Friday , 24 May 2019
Breaking News

कार्बन – डाइऑक्साइड

कार्बन – डाइऑक्साइड चक्र

वायुमण्डल की ऑक्सीजन श्वसन , ईन्धन के जलने तथा किण्वन आदि क्रियाओं द्वारा खर्च होती रहती है और कार्बन – डाइऑक्साइड वायु में छोड़ी जाती है । इसके साथ – साथ वायु से कार्बन – डाइऑक्साइड तथा जल से मिलकर पत्ते अपना भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन वायु में छोड़ते रहते हैं । कुछ CO2 शिलाओं के परिवर्तन में खर्च होती है । जो कार्बोनेट बनते हैं उन्हें गरम करने पर CO2 मुक्त हो जाती है । इसके अतिरिक्त सागर अधिक CO2 को अवशोषित कर लेता है और कमी होने पर छोड़ देता है । CO2 तथा O2 का चक्र चलता रहता है और उनकी मात्राएँ सामान्य बनी रहती हैं । ग्लूकोज , स्टार्च , वसा , प्रोटीन आदि दैनिक जीवन में काम आने वाले महत्त्वपूर्ण कार्वनिक पदार्थ हैं ।

जल के गुण

कार्बन – डाइऑक्साइड के उपयोग
यह प्रयुक्त होती है-

  1. सोडावाटर बनाने में , बीयर , फलों के रसों को बोतलों में सुरक्षित रखने में ।
  2. शुष्क बर्फ ( Dry ice ) के बनाने में और लाहोरी फ़ोड़े ( Local Sores ) की चिकित्सा में ।
  3. चीनी उद्योग में गन्ने का रस चूने से मुक्त तथा शोधन करने में ।
  4. सफ़ेदा ( Basic Carbonate of Lead – White Lead ) तथा धावन सोडा ( Na2CO3 ) के निर्माण में ( सालवे विधि ) ।
  5. कार्बोजन ( ऑक्सीजन + 5 to 10 % CO2 ) का मिश्रण बनाने में यह कृत्रिम श्वास के लिए रोगियों को दी जाती है । CO2 श्वास क्रिया को तेज़ करती है ।
  6. हरे पौधों के भोजन का मूल पदार्थ है ( Photo synthesis ) ।
  7. ईथर में या ऐसीटोन में इसका विलयन न्यून तापक्रम पर किए जाने वाले प्रयोगों में काम में लाया जाता है ।
  8. द्रवित CO2 को इस्पात के छोटे – छोटे बल्बों में बन्द करके रबर की जीवन रक्षा जैकेटों में और जीवन नावों ( Life rafts ) के लिए ।

ऑक्सीकरण और अपचयन

आग बुझाने के लिए – वायु में यदि 15% CO2 हो तो यह जलने में सहायता नहीं देती इसीलिए CO2 आग बुझाने के काम आती है । धातु के डिब्बे में मीठे सोडे ( NaHCO3 ) का सांद्रित विलयन भरा होता है और उसमें गन्धक के अम्ल से भरी बोतल लटकी रहती है । इसकी मुठिया पर प्रहार करने पर गन्धक के अम्ल की बोतल टूट जाती है और अम्ल सोडे पर अभिक्रिया करके COगैस उत्पन्न करता है जो तीव्रता से धारा के रूप में बाहर निकलती है और आग को बुझा देती है ।

‘ फोमाइट ‘ आग बुझाने वाले यन्त्र में गन्धक के अम्ल के स्थान पर एल्यूमिनियम सल्फेट का प्रयोग करते हैं , जिसमें लिकोरिस निष्कर्ष ( licorice extract ) मिला रहता है जो एक श्यान ( viscous ) द्रव है । इस यन्त्र से CO2 झाग के रूप में निकलती हैं और तेलों द्वारा लगी आग को तुरन्त बुझा देती है ।

Check Also

ऑक्सीकरण और अपचयन

ऑक्सीकरण और अपचयन ( Oxidation and Reduction ) ऑक्सीकरण एवं अपचयन के बारे में प्रारम्भिक …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *