Friday , 24 May 2019
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ऑक्सीकरण और अपचयन

ऑक्सीकरण और अपचयन ( Oxidation and Reduction )

ऑक्सीकरण एवं अपचयन के बारे में प्रारम्भिक धारणा
दहन ( आग का जलना ) रासायनिक क्रिया का प्राचीनतम उदाहरण है । आप जानते हैं कि आग जलाने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है जिससे ‘ ऑक्सीकरण ‘ की क्रिया सम्पादित होती है । इस प्रकार से , सर्वप्रथम , ऑक्सीजन और किसी पदार्थ के संयोग को ‘ ऑक्सीकरण ‘ की संज्ञा दी गई । उदाहरणतया , फ़ास्फोरस , गन्धक , कार्बन व मैग्नीशियम ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलते हैं । इस क्रिया में वे वायु मण्डल की ऑक्सीजन के साथ संयोग करते हैं और उनका ‘ ऑक्सीकरण ‘ हो जाता है । इस क्रिया से उत्पन्न नई वस्तु ‘ ऑक्साइड ‘ कहलाती है ।

इसके विपरीत ऑक्सीजन का किसी पदार्थ से अलग होना ‘ अपचयन ‘ कहा जाता है । उदाहरण के लिए क्यूप्रिक ऑक्साइड अयस्क ( ORE ) से चारकोल ( Carbon ) द्वारा ताँबे की धातु प्राप्त करने में अपचयन क्रिया होती है-

साधारणतया किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का योग अथवा घटाव को क्रमशः ‘ ऑक्सीकरण ‘ एवं ‘ अपचयन ‘ की संज्ञा दी गई ।

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ऑक्सीकरण एवं अपचयन के सम्बन्ध में आधुनिक धारणा
आज उपयुक्त धारणा में परिवर्तन हो चुका है । परमाणु रचना की नवीन जानकारी के आधार पर रासायनिक क्रियाओं में इलेक्ट्रानों का स्थानान्तरण आवश्यक है और इसी आधार पर ‘ ऑक्सीकरण ‘ और ‘ अपचयन ‘ की भी परिभाषा की जा सकती है । अर्थात् , ‘ ऑक्सीकरण ’ और ‘ अपचयन ‘ का सम्बन्ध इलेक्ट्रानों के स्थानान्तरण से हो गया है । निम्नलिखित रासायनिक क्रिया से यह स्पष्ट हो जायेगा

( i ) सोडियम धातु क्लोरीन गैस के साथ क्रिया करके निम्न समीकरण के अनुसार सोडियम क्लोराइड का निर्माण करती है ।

इस क्रिया में सोडियम परमाणु से एक इलेक्ट्रान निकल जाता है और नया पदार्थ सोडियम आयन ( Na+ ) कहलाता है ।

दूसरी ओर , क्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रान प्राप्त करके क्लोराइड आयन ( Cl ) बन जाता है ।

इस प्रकार सोडियम और क्लोरीन से सोडियम क्लोराइड का बनना ‘ ऑक्सीकरण ‘ ‘ अपचयन ‘ क्रिया का उदाहरण हुआ । इसमें सोडियम का आक्सीकरण तथा क्लोरीन का अपचयन हो रहा है ।

( ii ) कापर सल्फेट के विलयन से लोहा ताँबे को हटाकर उसका स्थान ले लेता है ।

उपयुक्त समीकरण में लोहा तांबे को दो इलेक्ट्रान देकर Fe++ ( आयरन आयन ) बन गया ।

कापर आयन ( Cu++ ) इन दोनों इलेक्ट्रानों को लेकर उदासीन कापर बन गया ।

इस तरह कापर सल्फेट के घोल में कापर के स्थान पर लोहा आकर आयरन सल्फेट ( FeSO4 ) बनना ‘ आक्सीकरण – अपचयन ‘ क्रिया का उदाहरण हुआ । इस क्रिया में लोहे का आक्सीकरण कापर आयन द्वारा हुआ ।

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( iii ) फेरस क्लोराइड ( FeCl2 ) क्लोरीन के साथ क्रिया करके फैरिक क्लोराइड ( FeCi3 ) बनाता है ।

….’ आक्सीकरण ‘

इस प्रकार फैरस आयन ( Fe++ ) से एक इलेक्ट्रान के निकल जाने पर फैरिक आयन ( Fe+++ ) बन गया

दूसरी और , फैरिक क्लोराइड ( FeCl3 ) का फेरस क्लोराइड ( FeCl2 ) में परिवर्तित होना ‘ अपचयन ‘ का उदाहरण है ।

 ‘ अपचयन ‘

आपने देखा कि Fe+++ ( इक आयरन प्रायन ) एक इलेक्ट्रान लेकर Fe++ ( अस आयरन आयन ) बन गया ।

इस तरह स्पष्ट हुआ कि ‘ ऑक्सीकरण ‘ में इलेक्ट्रान की हानि और अपचयन में इलेक्ट्रान की प्राप्ति सन्निहित है ।

अतः रासायनिक क्रिया में वह पदार्थ जिसको इलेक्ट्रान की प्राप्ति होती है । ऑक्सीकारक ( Oxidising Agent ) कहलाता है , और जिस पदार्थ में इलेक्ट्रान की हानि होती है , ‘ अपचायक ‘ ( Reducing Agent ) कहलाता है ।

ऊपर वणित रासायनिक क्रियाओं में
( i ) क्लोरीन ऑक्सीकारक है और सोडियम अपचायक ।
( ii ) Cu++ आयन ऑक्सीकारक है और आयरन धातु अपचायक
( iii ) Fe+++ आयन आक्सीकारक है और Fe++ आयन अपचायक

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इसीलिए , सामान्यतया कहा जाता है कि Fe+++Cl3-3 ऑक्सीकारक पदार्थ है और Fe+++Cl2-2 अपचायक पदार्थ ।

ऑक्सीकरण , अपचयन और संयोजकता परिवर्तन ( Oxidation , Reduction and Change of Valency )
स्पष्ट है कि ऑक्सीकरण और अपचयन में संयोजकता का परिवर्तन होना भी निहित रहता है । ऑक्सीकरण क्रिया में संयोजकता में वृद्धि होती है ( Fe++ →Fe+++ ) ( संयोजकता 2 से 3 हुई ) और अपचयन में संयोजकता घटती है ( Fe+++ → Fe++ ) ( संयोजकता 3 से 2 हुई )

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