Tuesday , 16 July 2019
Home / सामान्य ज्ञान / इतिहास / कलिंग युद्ध

कलिंग युद्ध

वास्तव में अशोक के पिता तथा दादा ही अपने राज्य की सीमाओं का पर्याप्त विस्तार कर गये थे , इसलिए अशोक को अधिक युद्ध नहीं करने पड़े । चन्द्रगुप्त तथा बिन्दुसार ने लगभग सारे उत्तर भारत पर अपना अधिकार कर रखा था । शिलालेख XIII में बताया गया है कि अशोक ने केवल कलिंग को विजय किया था । यह भी बताया गया है कि यह विजय राज्याभिषेक से लगभग आठ वर्ष पश्चात् अर्थात् लगभग 261 ई० पू० में हुई थी । कलिंग आज के उड़ीसा राज्य में है ।

अशोक के तेरहवें शिलालेख से पता चलता है कि यह बहुत भयानक युद्ध हुआ था । इसमें खून की नदियाँ बह निकलीं थीं । कलिंग के राजा का पता नहीं चला । अशोक के शिलालेख से पता चलता है कि ” 1,50,000 लोगों को देश से निकाल दिया गया , 1,00,000 व्यक्ति युद्ध में मारे गए और इससे भी कई गुणा अधिक गम्भीर घावों से भर गए थे । “

इस तरह के नर – संहार के पश्चात् अशोक ने कलिंग पर विजय प्राप्त की और कलिंग को अपने राज्य में शामिल कर लिया , परन्तु इस विजय से अशोक को कोई प्रसन्नता न हुई । उसे अपनी विजय में पराजय की झलक दिखाई दी । क्योंकि युद्ध में हुए नर – संहार को देखकर उसका हृदय कांप उठा था । घर – घर से आती हुई रोने की आवाजें उससे उसके जुल्मों का हिसाब मांग रही थीं ।

कलिंग विजय के प्रभाव ( Effects of Kalinga’s Conquest ) कलिंग विजय के पश्चात् अशोक के जीवन में बहुत परिवर्तन आया इस लड़ाई के निम्नलिखित प्रभाव पड़े :-

अशोक दिग्विजयी के स्थान पर धर्म विजयी ( Ashoka became a Conqueror of religion , instead of Territories )

इसी भांति डॉ० मुकर्जी का विचार है इस लड़ाई ने अशोक के मन में क्रांति उत्पन्न कर दी । उससे रक्त रंजित मानवता न देखी गई । इस भयानक दृश्य ने उसकी आत्मा को कंपा दिया ; इसलिए उसने सदा के लिए युद्ध की नीति को त्याग दिया । कलिंग की लड़ाई उसकी प्रथम तथा अन्तिम लड़ाई कही जाती है । उसने तलवार की अपेक्षा प्रेम से संसार को विजय करने का निश्चय किया अर्थात् अशोक ने दिग्विजय के स्थान पर धर्म – विजय का मार्ग अपना लिया । इस विषय में डॉ० मजूमदार ( Dr . Majumdar ) ने ‘ Advanced History of India ‘ के पृष्ठ 104 पर लिखा है – ” कलिंग के युद्ध ने अशोक के जीवन में एक नया परिवर्तन उपस्थित कर दिया । इस परिवर्तन के परिणाम भारतीय इतिहास और पूर्वी दुनिया के इतिहास पर इस प्रकार पड़े , जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ।

अहिंसा ( Ahimsa )

अशोक ने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया । कलिंग की लड़ाई से पूर्व वह शिव भक्त था और मांस आदि भी खा लेता था और शिकार भी खेलता था , परन्तु बाद में उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया और अहिंसा का पुजारी बन गया । उसने शिकार खेलना बन्द कर दिया । उसके भोजनालय में मांस बनना निषिद्ध हो गया । उसने पशुओं को कष्ट देने , उनका वध करने और उनकी बलि देने की प्रथा बन्द कर दी । उसने बौद्ध धर्म के प्रचार तथा उसे लोकप्रिय बनाने के प्रयत्न किए । इसे कलिग की लड़ाई का परिणाम कहा जा सकता है ।

लोक कल्याण ( Public Welfare )

कलिंग की लड़ाई का प्रभाव अशोक की शासन व्यवस्था पर भी पड़ा । उसने लड़ाई करना छोड़ दिया और लोकहितकारी शासन व्यवस्था लागू की । उसने लोगों की सुविधा के लिए सड़कें बनवाई और उनके किनारों पर वृक्ष लगवाए और सराएं बनवाई । मनुष्यों तथा पशुओं के इलाज के लिए अस्पताल खोले , कुएं खोदे गए और जनता के कष्ट निवारण के लिए हर तरह के प्रयत्न किए गए । लोगों को नैतिक रूप से उन्नत करने के उद्देश्य से धर्म महामात्रों ( Dharm Maharmatras ) की नियुक्ति की गई ।

धर्म की स्थापना ( Founded a new religion )

कलिंग की लड़ाई का ही परिणाम था कि अशोक ने नए धर्म की स्थापना की । वह स्वयं बौद्ध था परन्तु जो धर्म उसने जनता के सामने रखा उसमें सब धर्मों की विशेषताएं थीं । वह इस लोक में ही लोगों को सुख नहीं पहुचाना चाहता था बल्कि ‘ धर्म ‘ के साथ उनका परलोक भी सुधारना चाहता था ।

राज्य विस्तार ( Extent of Empire )

कलिंग विजय से अशोक के राज्य में एक और प्रान्त की वृद्धि हो गई । इस प्रान्त के अतिरिक्त लगभग सारा भारत उसके पिता तथा दादा ने अपने अधिकार में कर लिया था । उसके राज्य में सारा उत्तरी भारत दक्षिण में मैसूर , नेपाल तथा कश्मीर अादि भी सम्मिलित थे । बिलोचिस्तान , काबुल तथा हिरात के कुछ भाग भी उसके अधीन थे ।

 

महानता की प्राप्ति ( Attainment of greatness )

कलिग की लड़ाई में अशोक को अन्ततः विजय प्रान्त हुई परन्तु इस युद्ध की विनाश लीला का उसके मन मस्तिक पर बहुत प्रभाव पड़ा । विजय के पश्चात् लड़ाई न करने का निर्णय अशोक की महानता का प्रतीक है । परास्त होकर तौबा करना तो साधारण बात है , परन्तु विजयी तथा शक्तिशाली होते हुए भी शक्ति का प्रयोग न करना सचमुच एक महानता का प्रमाण है । इसके अतिरिक्त लड़ाई की नीति त्याग कर अशोक ने शांति , प्रेम तथा आहिंसा की नीति अपनाई । लोकहित का प्रण किया और घायल मानवता पर प्यार तथा सहानुभूति की मरहम लगाई , धर्म का प्रचार किया । चारों ओर उसकी जय – जयकार हो गई और अशोक की गणना संसार के महान् सम्राटों में होने लगी ।

सैनिक शक्ति क्षीण और मौर्य साम्राज्य का पतन ( weakened military power and the decline of the Mauryan empire )

कलिंग की लड़ाई के पश्चात् अशोक की अहिंसा की नीति के कारण उसकी सैनिक शक्ति पर्याप्त क्षीण हो गई क्योंकि सैनिक शांतिपूर्वक ऐश्वर्य का जीवन व्यतीत करने लगे । वे युद्ध करना ही भूल गए और उन्हें इसका कोई अभ्यास न रहा । जब तक अशोक सत्तारूढ़ रहा , सेना से कोई काम न लिया गया । बाद में जब यूनानियों ने भारत पर अक्रिमण प्रारम्भ कर दिये तो उनका सामना ये निष्क्रय एवं युद्ध – कला से अनभिज्ञ सैनिक न कर सके और मौर्य वंश की अधोगति प्रारम्भ हो गई ।

अशोक के निजी जीवन पर प्रभाव ( Effect on his Personal life )

अशोक के अपने जीवन में कलिंग की लड़ाई के कारण बहुत परिवर्तन आया । पहले वह भी राजा महाराजाओं का सा विलासी जीवन व्यतीत करता था । वह शिकार खेलता था और मांस खाता था । उसका काम अत्याचारी का सा था , परन्तु कलिंग की लड़ाई के पश्चात् उसने शिकार खेलना छोड़ दिया और मांस खाना बन्द कर दिया । लड़ाई से पूर्व वह मार – काट का बहुत शौकीन था , परन्तु बाद में शांति का पुजारी बन गया और लोगों से नम्र व्यवहार करने लगा था ।

Check Also

जल के गुण

जल एक रसायनिक पदार्थ है जिसका रसायनिक सूत्र H2O है: जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन के परमाणु सहसंयोजक बंध के द्वारा एक ऑक्सीजन के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *