Monday , 22 July 2019
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मगध का उत्थान

मगध का उत्थान (Rise of Magadh)

मगध का उत्थान

छठी शताब्दी ई . पू . में मगध राज्य का उत्थान ब्रहद्रथ वंश से हुआ । इस राज्य के प्रमुख वंश निम्न हैं –

  1. हर्यक वंश ( 544 ई . पू . से 412 ई . पू . )
  2. शिशुनाग वंश ( 412 – 344 ई . पू . )
  3. नंद वंश ( 344 – 324 – 23 ई . पू . )

विदेशी आक्रमण तथा सिकन्दर

हर्यक वंश ( Haryank Dynasty )

बिम्बिसार ( श्रोणिक )
  • बिम्बिसार ( 558 – 491 ई . पू . ) हर्यक वंश का संस्थापक था । इनकी राजधानी गिरिब्रज ( राजगृह ) थी |
  • बिम्बिसार ने अपने राजवैध जीवक ‘ को अवन्ति नरेश चण्डप्रद्योत की पीलिया ( पाण्डु ) नामक बीमारी को ठीक करने के लिए भेजा था ।

अजातशत्रु ( कुणिक / अशोक चंड )

  • बिम्बिसार के पुत्र अजातशत्रु ( 492 – 460 ई . पू . ) ने उसकी हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया ।
  • अजातशत्रु की हत्या उसके पुत्र उदायिन ने 461 ई . पू . की थी ।

उदायिन

  • उदायिन ने गंगा एवं सोन नदियों के संगम पर स्थित पाटलिपुत्र को अपनी राजधानी बनाया । पाटलिपुत्र ( वर्तमान पटना ) की स्थापना का श्रेय उदायिन को जाता है ।

शिशुनाग वंश ( Shishunag Dynasty )

  • हर्यक वंश के एक सेनापति शिशुनाग ने उदयिन के पुत्र नागदशक को हटाकर मगध के सिंहासन पर अधिकार करके शिशुनाग वंश की स्थापना की । ।
  • शिशुनाग के शासन काल में राजधानी पाटलिपुत्र से बदलकर वैशाली ले जायी गयी ।
  • शिशुनाग वंश का अंतिम शासक नंदिवर्धन था ।

नन्द वंश ( Nanda Dynasty )

  • इस वंश का संस्थापक महापद्मनन्द को माना जाता है ।
  • पुराणों में महापद्मनन्द को सर्वक्षत्रान्तक कहा गया है ।
  • नन्द वंश का अन्तिम शासक धनानन्द था । इसी के शासन काल में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया । धनानन्द की चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु चाणक्य की सहायता से हत्या कर मौर्य वंश की स्थापना की ।

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