Friday , 24 May 2019
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गुप्त वंश

गुप्त वंश (240-480 ई.) (Gupta Dynasty)

गुप्त वंश

श्रीगुप्त ( 240 – 280 ई . ) ( Srigupta )
श्रीगुप्त गुप्त वंश का संस्थापक था । उसने 240 – 280 ई . तक शासन किया । उसने महाराज की उपाधि प्राप्त की । उसके बाद उसका पुत्र घटोत्कच शासक बना ।

चन्द्रगुप्त प्रथम ( 320 – 335 ई . ) ( Chandragupta I)
चन्द्रगुप्त प्रथम इस वंश का प्रथम प्रमुख शासक था तथा उसे गुप्त संवत् का संस्थापक माना जाता है ।

भारत के यवन राज्य

समुद्रगुप्त ( 335 – 375 ई . ) ( Samudragupta )
उसे भारत का नेपोलियन भी कहते हैं ।

  1. हरिषेण के ‘ प्रयागप्रशस्ति ‘ , इलाहाबाद का स्तंभ समुद्रगुप्त सम्बन्धित है ।
  2. समुद्रगुप्त उच्चकोटि का कवि एवं संगीतज्ञ भी था , इसी कारण उसे | ‘ कविराज ‘ कहा जाता था ।
  3. समुद्रगुप्त को सिक्कों पर वीणा बजाते हुए चित्रित किया गया ।

चन्द्रगुप्त द्वितीय ( 380 – 415 ई . ) ( Chandragupta II )

समुद्रगुप्त के बाद उसका पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय शासक बना जिसका उपनाम विक्रमादित्य था । प्राचीन भारत की श्रेष्ठतम साहित्य प्रतिभा कालिदास उसकी राज्यसभा के रत्न थे । धनवन्तरि जैसे प्रसिद्ध चिकित्सक थे . इसी के शासनकाल में हुए थे । चीनी यात्री फाह्यान भी इसी के शासनकाल में आया था । दिल्ली में कुतुबमीनार के समीप महरौली का सतम्भ का निर्माण चन्द्रगुप्त द्वितीय ने करवाया था । इसके पुत्र कुमार गुप्त प्रथम ने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी । इसे ऑक्सफोर्ड ऑफ महायान बौद्ध कहा गया । इसी वंश शासक स्कन्दगुप्त के शासनकाल में हूण जाति के लोगो ने अपने आक्रमण गुप्त राज्य पर आरम्भ कर दिये थे । स्कन्दगुप्त ने गिरनार पर्वत पर स्थित सुदर्शन झील का पुनरुद्धार करवाया । गुप्त युग में शान्ति , समृद्धि एवं चतुर्मुखी विकास हुआ , जिसके फलस्वरूप इस काल को भारतीय इतिहास में स्वर्ण युग के नाम से जाना जाता हैं ।

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