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बोद्ध धर्म और जैन धर्म में असमानताएं

असमानताएं ( Points of Differences )

उपरोक्त समानताओं से यह भाव कदापि स्वीकार्य नहीं होना चाहिए कि इन धर्मों में कोई मतभेद नहीं है । यदि ऐसा होता तो इन दो धर्मों की आवश्यकता ही क्या थी एक ही धर्म पर्याप्त था । बोद्ध धर्म और जैन धर्म में असमानताएं निम्नलिखित हैं :-

कठिन तपस्या और मध्यम मार्ग ( Hard Self – Penance and Middle Path )

जैन मत वाले शरीर को कठोर तपस्या तथा भूखे रह कर इसे हड्डियों को ढांचा बना देने पर अधिक बल देते हैं , परन्तु इसकी तुलना में बौद्ध धर्म न तो विषयी जीवन को उत्तम मानता है और न ही जीवन में कठोर तपस्या करके शरीर को कांटा बनाने के पक्ष में है । अतएव महात्मा बुद्ध ने इन दोनों को त्याग कर मध्यम मार्ग ( Middle Path ) को अपनाया ।

बोद्ध धर्म और जैन धर्म में समानताएं

अहिंसा के सिद्धान्त में अन्तर ( Difference in the Doctrine of Ahimsa )

जैन धर्मानुयायियों की अहिंसा असीमित है । वे उन कीटाणुओं की भी रक्षा करना चाहते हैं जो मानवीय दृष्टि से ओझल हैं । वे पत्थरों , फूलों और वृक्षों को भी सचेतन मानते हैं । उन्हें भी दु : ख देने के ये विरोधी हैं , परन्तु इसके विपरीत बौद्ध धर्म के अनुयायी अहिंसा को एक अावश्यक तत्त्व मानते हैं , परन्तु वे वृक्षों , फूलों , पत्थरों आदि की परवाह नहीं करते , अपितु पशु – पक्षियों की हत्या के विरुद्ध हैं ।

मुक्ति के विभिन्न साधन ( Different ways to Nirvana )

बौद्ध धर्म के अनुयायी तो महात्मा बुद्ध द्वारा स्थापित अष्टमार्ग पर चलते हैं । जैनी मुक्ति प्राप्ति के लिए “ त्रिरत्न ” की पालना करना आवश्यक समझते हैं ।

ईश्वर के विषय में मतभेद ( Difference regarding God )

जैन धर्मानुयायी तो ईश्वर के अस्तित्व में बिल्कुल ही विश्वास नहीं रखते , परन्तु बौद्ध धर्म वाले इंस सम्बन्ध में बिल्कुल मौन हैं । वे न तो ‘ हां ‘ कहते हैं और न ‘ नहीं ‘ ।

प्रचार संगठनों में अन्तर ( Difference in Missionary Organization )

यह सत्य है कि दोनों ने धर्म प्रचार के लिए संघ बनाए हुए थे , परन्तु बौद्ध धर्म के संगठन जैन धर्म की अपेक्षा कहीं अच्छे थे । यही कारण है कि जैन धर्म दूर – दूर नहीं फल सका था । बौद्ध धर्म अन्य देशों में फैल गया ।

परिधानों में अन्तर ( Difference in Dress )

जैन धर्म का एक श्वेताम्बरी सम्प्रदाय श्वेत कपड़े पहनता था और दूसरा जिसे दिगम्बरी कहा जाता है , के लोग बिल्कुल नग्न रहा करते थे । बौद्ध धर्म में नग्न रहना बुरा समझा जाता था और बौद्ध भिक्षु सादे परिधान में रहते थे ।

विभिन्न धार्मिक ग्रन्थ ( Different Religious Books )

दोनों धर्मों के अपने – अपने विभिन्न धामिक ग्रन्थ हैं । बौद्ध धर्म की धार्मिक पुस्तकों को त्रिपिटक ( Tripitakas ) तथा जैनियों की धार्मिक पुस्तकों को अंग ( Angas ) कहते हैं ।

पूजनीय व्यक्तियों में भिन्नता ( Different Personalities for Worship )

बौद्ध धर्म अनुयायी अपने जिन व्यक्तियों को पूजते हैं उन्हें बौद्धिसत्व ( Bodhisatvas ) कहा जाता है । जैन धर्म वाले अपने तीर्थंकरों ( Tirthankaras ) की पूजा करते हैं ।

विस्तार क्षेत्रों में विभिन्नता ( Difference in the areas of Expansion )

बौद्ध धर्म तो अपने प्रचार और सरल सिद्धान्तों के कारण अन्य देशों में विकसित हो गया , परन्तु जैन धर्म अपने सिद्धान्तों की कठोरता के कारण केवल भारत तक ही । सीमित रहा और अन्य देशों में इसकी पहुंच नहीं हो सकी ।

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