Friday , 24 May 2019
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बोद्ध धर्म

बोद्ध धर्म (Buddhism)

गौतम बुद्ध को बौद्ध धर्म का प्रवर्तक माना जाता है । ये महावीर के समकालीन थे । ज्ञान प्राप्त करने के बाद इन्हें बुद्ध कहा जाने लगा था । बुद्ध का अर्थ ज्ञान प्राप्ति होता है । उन्होंने सांसारिक दुःखों से मुक्ति पाने के लिए 29वें वर्ष में गृह त्याग किया । इस घटना को बौद्ध ग्रंथों में महाभिनिष्क्रमण कहा गया है । कई वर्षों की तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में एक दिन बोधगया ( उरूवेला ) के निकट एक पीपल के वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान का बोध हुआ और तब से बुद्ध हो गये । उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ ( ऋषिपतन ) में दिया । बौद्ध परम्परा में इसे धर्मचक्रप्रवर्तन के नाम से जाना जाता है ।

बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य ( Four Noble Truth of Buddhism )
दुःख अर्थात् समस्त संसार दुःखमय है ।
दुःख समुदाय संसार के समस्त दुःखों का कारण इच्छा या । तृष्णा अथवा लालसा है ।
दुःख निरोध इच्छाओं या तृष्णाओं को अपने वशीभूत रखकर ही दुःख को खत्म किया जा सकता है ।
दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा इसके अन्तर्गत दुःख निवारक मार्ग बताये गये हैं । ये आठ मार्ग हैं जो अष्टांगिक मार्ग कहे जाते हैं ।

गौतम बुद्ध से सम्बन्धित व्यक्ति
( People who are related to Gautam Buddha )

 यशोधरा पत्नी
प्रजापति गौतमी धाय माता ( मौसी )
चन्न सारथि
अलार कलाम प्रथम गुरु
राहुल पुत्र
देवदत्त चचेरा भाई
कठक गौतम बुद्ध का प्रिय घोड़ा
आनन्द गौतम बुद्ध का सबसे प्रिय शिष्य

सिंधु घाटी सभ्यता

उनकी शिक्षाएँ , जिन्हें बौद्ध धर्म कहा जाता है , चार आर्य सत्यों पर आधारित है –
दुःख संसार में दुःख है ।
दुख समुदाय   दु:ख के कारण है ।
निरोध दुःख का निवारण हो सकता है
मार्ग इसके निवारण के लिए अष्टांगिक मार्ग है ।
  • दुखों का अस्तित्व है ।
  • दुःख इच्छाओं से उत्पन्न होता है तथा अधूरी इच्छाएँ पुनर्जन्म को प्रवृत्त करती हैं ।
  • जब इच्छाएं दूर हो जाती है तो पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता है , यही निर्वाण है तथा
  • इच्छाओं को विचार, व्यवहार और वाणी में शुद्धता लाकर , अष्टमार्ग पर चलकर जीता जा सकता है ।

अष्टमार्गी सिद्धान्त – यह दुःख निरोध मार्ग है । इसका निरूपण निम्न प्रकार से किया जा सकता है –
( i ) सम्यक् ज्ञान , ( ii ) सम्यक् इच्छा , ( iii ) सम्यक् वाणी , ( iv ) सम्यक् जीवन , ( v ) सम्यक प्रयत्न ,  ( vi ) सम्यक् बुद्धि ,  ( vii ) सम्यक् समाधि तथा  ( viii ) सम्यक कार्य ।

साहित्य – यौद्ध साहित्य मूलतः पाली भाषा में लिखे गये थे तथा मुख्यतः त्रिपिटकों में समाहित हैं . ये निम्नलिखित हैं –
( a ) सुत्तपिटक 
( b ) अमिधम्म पिटक 
( c ) विनय पिटक 

इसके अतिरिक्त निम्नलिखित यौद्ध साहित्य उल्लेखनीय हैं –

दीपवंश तया महावंश
महावस्तु
मिलिन्दपन्हो में यूनानी शासक मिलिन्द तथा बौद्ध भिक्षु नागसेन के दार्शनिक विषय से सम्बन्धी वाद – विवाद का वर्णन किया गया है ।

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