Friday , 24 May 2019
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गुप्तकालीन कला और साहित्य

कला और साहित्य की उन्नति ( Progress in Art and Literature )

समुद्रगुप्त केवल युद्धों के लिए ही महान् नहीं था । उसने सभी लड़ाइयां जीती हैं , विजय के साथ ही शांति की कलाओं में भी वह महान् था । समुद्रगुप्त जहां एक महान् विजेता था वहां एक विद्वान् साहित्य और कला का भी प्रेमी था , उसके दरबार में विद्वानों का बहुत सम्मान किया जाता था । वह कलाकारों , साहित्यकारों और विद्वानों का बहुत आदर करता था । हरिसेन ( Harisen ) उसके दरबार का मुख्य कवि था ।

इसके काल में कला और साहित्य की उन्नति का पता निम्नलिखित शीर्षकों द्वारा प्रकट और प्रमाणित होगा :—

कविता में रुचि ( Love for Poetry )

समुद्रगुप्त कवियों का बहुत सम्मान किया करता था । क्योंकि वह स्वयं एक अच्छा कवि था । उसने अनेक कविताएं रची थीं ।

संगीत का प्रेमी ( Love for Music )

समुद्रगुप्त को संगीत से भी बहुत प्यार और लगाव था । वह स्वयं बहुत अच्छी बीणा बजा लेता था । इसके संगीत प्रेम का प्रमाण उसके एक सिक्के के ऊपर वीणा की छाप से मिलता है । दूसरे सिक्कों के ऊपर उसका चौकी के ऊपर बैठ कर वीणा वादन करना , जिससे इसके संगीत प्रेम का अच्छा प्रमाण मिलता है ।

विद्या प्रेमी ( Love for Learning )

समुद्रगुप्त अपने विद्या प्रेम के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है । उसका दरबार विद्वानों से भरा हुआ था । इसके दरबार में दो बौद्ध विद्वान् असंग ( Asunga ) और वसुबन्धु ( Vasubandhu ) भी रहते थे । प्रसिद्ध साहित्यकार हरिसेन तो उसके दरबार की शोभा थे ।

सुन्दर सिक्के ( Fine Coins )

समुद्रगुप्त का काल प्राचीन भारत के इतिहास में सिक्कों की कला के लिए बहुत प्रसिद्ध था । पहली बार इसने सोने के सुन्दर सिक्के बनाने की कला को प्रोत्साहन दिया । इन सिक्कों के ऊपर खुदे चित्रों की छाप होती थी जिनमें समुद्रगुप्त के हाथ में धनुष लिए हुए , वीणा बजाते हुए , शेर का शिकार करते हुए के चित्र बहुत ही रोचक हैं । सिक्के सोने के अतिरिक्त तांबे और चांदी के भी होते थे । ये कई प्रकार के होते थे ।

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