Monday , 22 July 2019
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सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता

कार्बन डेटिंग के अनुसार सिन्धु घाटी सभ्यता का समय 2350 ई . पू . से 1750 ई . पू . माना गया है । यह कास्य युगीन सभ्यता थी तथा जॉन मार्शल ने इसे ‘ सिंधु घाटी सभ्यता ‘ नाम दिया था ।

बोद्ध धर्म के बारे में

सिन्ध घाटी सभ्यता की विशेषताएँ ( Characteristics of Indus Valley Civilization )

सिन्धु समाज उचित समतावादी था । यहाँ के सुनियोजित नगरों के भवन पक्की ईंटों से बने थे तथा सड़कें समकोण पर काटती थीं । इस सभ्यता के लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था । यह समाज मातृ प्रधान था तथा मातृदेवी की पूजा भी की जाती थी । योनि पूजा , पशुपति पूजा के भी प्रमाण मिले हैं । इनक व्यवसाय पशुपालन भी था ।
इस अज्ञात सभ्यता की खोज रायबहादुर दयाराम साहनी ने की थी तथा यह कार्य वर्ष 1921 में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में किया था । इस सभ्यता की लिपि को सर्वप्रथम पढ़ने का प्रयास 1954 में हंटर महोदय ने किया था । इस लिपि को “ गोमूत्रिका रौली ” या बास्त्रोफेदन कहा जाता है ।

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