Friday , 24 May 2019
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संगम युग

संगम युग (Sangam Age)

संगम युग

सुदूर दक्षिण के संगम युग की जानकारी का प्रमुख स्रोत संगम साहित्य है। संगम साहित्य में हमे तीन प्रमुख राज्यों – पाण्ड्य , चोल तथा चेरों के विषय जानकारी मिलती है । ई . की प्रथम शताब्दी से तीसरी शताब्दी ई . पू . के मध्य तक ‘ संगम युग ‘ का समय माना जाता है ।

महाजनपद

संगम साहित्य ( Sangam Literature )
तमिल भाषा में उपलब्ध प्राचीनतम साहित्य संगम – साहित्य ‘ है , जो तीन संगमों के उपरान्त तैयार किया गया था । ये संगम पाण्ड्य शासकों के संरक्षण में हुआ था ।

  1. प्रथम संगम ( First Sangam ) – यह संगम पाण्ड्य शासकों के संरक्षण में उनकी प्राचीन राजधानी ‘ मदुरा ‘ में अगस्त्य ऋषि की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था ।
  2. द्वितीय संगम ( Second Sangam ) – द्वितीय संगम को भी पाण्ड्य शासकों का सहयोग प्राप्त हुआ था । यह कपाटपुरम् अथवा अलवै में शुरू में अगस्त्य ऋषि की अध्यक्षता , लेकिन बाद में तोल्काप्पियर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था ।
  3. तृतीय संगम ( Third Sangam ) – यह संगम उत्तरी मदुरा में नक्कीयर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था ।

प्रमुख तमिल ग्रंथ ( Famous Tamil Texts )

तोल्काप्पियम् – यह ‘ द्वितीय संगम ‘ का एक मात्र शेष ग्रन्थ है । अगस्त्य ऋषि के बारह योग्य शिष्यों में से एक ‘ तोल्कापियर ‘ द्वारा यह ग्रन्थ लिखा गया था ।
पत्तिनपाले – इसकी रचना भी रुद्रनकन्नार ने की । इस ग्रन्थ में प्रेमगीत संगृहीत है ।
सिरुपानात्रुप्पदै – इसकी रचना नत्थनार ने की थी ।
पदिनेकिल्लकणवन्कु – यह तृतीय संगम का तीसरा संग्रह ग्रन्थ है ।

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