Wednesday , 24 July 2019
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बाबर के आक्रमण के समय उत्तरी भारत की दशा

बाबर के भारत आक्रमण से पहले उत्तर भारत की दशा –

दिल्ली ( Delhi )

दिल्ली की पुरातन भव्यता तथा शक्ति अब नहीं रही थी । बाबर के आक्रमण के समय दिल्ली पर इब्राहीम लोधी ( Ibrahim Lodhi ) शासन करता था । अभिमानी तथा क्रोधी स्वभाव के कारण उसके बहुत से सरदार उससे रुष्ट हो गए थे । उसने अमीरों , वजीरों का अपमान भी किया था । इब्राहीम के इस तरह के स्वभाव के कारण उसके शासन में विद्रोह तथा उपद्रव हो रहे थे । अमीरों – वजीरों ने इससे तंग आकर ही बाबर को भारत पर आक्रमण का निमन्त्रण भेजा था ।

पंजाब ( Punjab )

पंजाब यद्यपि उस समय दिल्ली के अधीन ही था , परन्तु यहां के गवर्नर दौलत खां लोधी ( Daulat Khan Lodhi ) ने सुलतान के विरुद्ध विद्रोह कर दिया था और स्वयं स्वतन्त्र शासक बन बैठा था । वह अपने पुत्र दिलावर खां ( Dilawar Khan ) का अपमान , जो दिल्ली में हुआ था , सहन न कर सका । उसने इब्राहीम के चाचा आलम खां ( Alam Khan ) के साथ मिलकर बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमन्त्रित किया था । इसके अतिरिक्त मुलतान तथा सिन्ध के शासक इब्राहीम के पक्ष में नहीं थे ।

गुजरात ( Gujrat )

गुजरात 1401 ई० तक दिल्ली के सुलतानों के अधीन ही रहा । 1401 में जाफर खां ( Jafar Khan ) दिल्ली से स्वतन्त्र हो गया । उसने सिंहासन पर बैठकर अपना नाम मुजफ्फर शाह रख लिया । बाबर के आक्रमण के समय गुजरात पर मुज्जफर शाह द्वितीय ( Muzaffar Shah II ) का शासन था । वह अपने शासन काल में अनेक शत्रुओं से लड़ता रहा ।

India map in 1526

मेवाड़ के राणा सांगा ( Rana Sanga ) ने उसे अप्रैल 1526 ई० में हरा दिया । 1526 ई० में उसकी मृत्यु के पश्चात् उसका पुत्र बहादुरशाह ( Bahadur Shah ) सिंहासनारूढ़ हुआ । वह बहुत ही चतुर तथा महत्त्वाकांक्षी था ।

बंगाल ( Bengal )

फिरोज तुगलक ( 1351 – 1388 ) के समय बंगाल स्वतन्त्र हो गया था । उसके पश्चात् दिल्ली के शासकों ने बंगाल को अपने अधीन करने के अनेक प्रयत्न किए , परन्तु वे विफल रहे । जिस समय बाबेर का आक्रमण हुआ , उस समय बंगाल पर नसरत शाह ( Nasrat Shah ) का शासन था । वह सफल राजा तथा बंगला साहित्य का संरक्षक था । बंगाल राज्य उस समय समृद्ध था तथा वहां के लोग सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे थे ।

मालवा ( Malwa )

मालवा में दिलावर खां ( Dilawar Khan ) ने अपना स्वतन्त्र राज्य स्थापित कर लिया था । उसके वंशज महमूद द्वितीय से राजपूतों ने 1525 ई० में उसका राज्य छीन लिया था । इस प्रकार बाबर के आक्रमण के समय मालवा पर राजपूत राजा मेदनी राव ( Medani Rao ) का शासन था ।

मेवाड़ ( Mewar )

मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़ थी । यह राजस्थान का एक शक्तिशाली राज्य था । बाबर के आक्रमण के समय उस पर राणा संग्राम सिंह जो राणा सांगा ( Rana Sanga ) के नाम से प्रसिद्ध था , का शासन था । वह एक स्वाभिमानी राजपूत , वीर सेनापंति तथा अच्छा नीतिवेत्ता था । आसपास के मुसलमान शासक उससे ईर्ष्या करते थे । वह दिल्ली पर हिन्दू राज्य स्थापित करना चाहता था । उसने बाबर को इब्राहीम पर आगरा की ओर से आक्रमण करने का निमन्त्रण दिया था । परन्तु उसकी इच्छा पूरी न हो सकी क्योंकि बाबर इब्राहीम लोधी को हरा कर अपने देश न लौटा बल्कि उसने भारत में ही डेरा जमाने का निश्चय कर लिया था ।

सिन्ध ( Sindh )

मुहम्मद तुगलक के शासन काल में ही सिन्ध स्वतन्त्र हो गया था , परन्तु सुमरा वंश ( Sumra Dynasty ) पतन की ओर जा रहा था । इसलिए कन्धार के गवर्नर शाह वेग ( Shah Begh ) ने 1520 ई० में सिन्ध पर आक्रमण करके उसे अपने अधीन कर लिया था । उसके पुत्र शाह हुसैन ( Shah Hussain ) ने मुलतान पर अधिकार कर लिया । जब बाबर भारत आया तो उस समय सिंध पर अफ़गानों का अधिकार था ।

काश्मीर ( Kashmir )

1339 ई० में काश्मीर एक स्वतन्त्र राज्य था । इस पर शाह मिर्ज़ा ( Shah Mirza ) का शासन था । वह पहाड़ी राजा था ; इसलिए उसने अपनी स्वतन्त्रता को बनाए रखा । इस राज्य का विख्यात राजा जैनुल अबीदीन ( Zainul – Abidin , ( 1420 – 70 ) हुआ था । वह विद्या प्रेमी था और उसकी धार्मिक नीति भी सहिष्णुता पूर्ण थी, इसलिए उसे काश्मीर का अकबर कहा जाता है । 1470 ई० में उसकी मृत्यु के पश्चात् काश्मीर में अव्यवस्था फैल गई थी ।

जौनपुर ( Jaunpur )

जौनपुर पर इब्राहीम लोधी के छोटे भाई जलाल खां लोधी का शासन था , परन्तु उसकी सुलतान से अनबन थी ; इसलिए इब्राहीम ने उस पर आक्रमण करके उसे मार डाला था । उसके व्यवहार से तंग आकर सामन्तों ने नासिर खां लोहानी ( Nasir Khan Loanni ) को जौनपुर , बिहार तथा अवध का शासक स्वीकार कर लिया था । इस तरह इन तीनों राज्यों से सुलतान की शत्रुता पैदा हो गई थी ।

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