Monday , 22 July 2019
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मुहम्मद तुग़लक़ की विफलता के कारण

मुहम्मद बिन तुग़लक़ (1325-1351 ई.)

यदि ध्यानपूर्वक देखा जाए तो हम इस परिणाम पर पहुंचते हैं कि मुहम्मद तुगलक की योजनाएं गलत अथवा जनता को लूटने वाली योजनाएं नहीं थीं । उनके पीछे जन – कल्याण की भावना निहित थी । मुहम्मद तुगलक वैसे एक विद्वान् तथा प्रभावशाली व्यक्ति था , परन्तु फिर भी वह एक राजा तथा शासक के रूप में सफल नहीं रहा । उसके विफलता के कई कारण थे जिसमें से मुख्य – मुख्य निम्नलिखित हैं :

समय अनुकूल नहीं था ( Time was not Favourable ) – मुहम्मद तुग़लक़ की विफलता के कारण

मुहम्मद तुगलक की योजनाओं में कोई बुराई नहीं थी । उसने सभी योजनाएं जन – कल्याण के लिए बनाई थी परन्तु दुर्भाग्यवश समय ने उसका साथ न दिया । लोगों ने न तो उसकी योजनाओं को समझने का प्रयत्न किया और न ही उन योजनाओं को सफल बनाने में उसका साथ दिया । अधिकांश इतिहासकारों का विचार है कि मुहम्मद तुगलक अपने समय से पूर्व हुआ । उस समय के लोग बहुत प्रतिक्रियावादी थे जबकि मुहम्मद तुगलक बहुत प्रगतिवादी था जिससे उसकी योजनाएं सफल न हो सकीं ।

मुसलमानों द्वारा विरोध ( Opposition of the Muslims )

मुहम्मद तुगलक धार्मिक दृष्टि में उदारचित्त था । उसके लिए हिन्दू तथा मुसलमान एक समान थे । उपने शासन – व्यवस्था में मौलवियों को हस्तक्षेप न करने दिया जिससे कट्टर मुसलमान मुहम्मद के विरुद्ध हो गए ।

भयंकर अकाल ( Severe Famine )

प्रकृति ने भी मुहम्मद का साथ न दिया । उसके शासनकाल में लगभग दस वर्ष तक अकाल पडा रहा । इससे लोगों की बहुत दुर्दशा हुई और राजा का भी बहुत धन नष्ट हो गया था ।

विचित्र योजनाएं ( Strange Plans ) – मुहम्मद तुग़लक़ की विफलता के कारण

वास्तव में मुहम्मद तुगलक स्वयं भी बहुत सीमा तक अपनी विफलता के लिए उत्तरदायी था । उसने एक के पश्चात् दूसरी तथा दूसरी के पश्चात् तीसरी विचित्र योजना बनाई । इसका कारण यह था कि वे लोगों की समझ में ही नहीं आती थीं और लोग बहुत परेशान होते थे । यदि वे उन योजना को व्यावहारिक रूप देने का प्रयत्न करते थे तो उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पडता था । यदि नहीं करते थे तो सुलतान द्वारा दण्ड दिया जाता था ।

आर्थिक कठिनाइयाँ ( Financial Difficulties )

मुहम्मद तुगलक ने अपनी विचित्र योजनाओं पर बहुत – सा धन नष्ट कर दिया था और उसका खज़ाना खानी हो गया था । धन के अभाव में वह कोई कार्य नहीं कर सकता था ; इसलिए वह कठिनाइयों में घिर गया था ।

विदेशियों द्वारा विद्रोह ( Revolts of the Foreigners )

मुहम्मद तुगलक ने विदेशियों को ही अपने राज्य में उच्च पदों पर नियुक्त कर रखा था । यहां के लोग उनसे ईष्र्या करते थे , परन्तु दुःख तो तुगलक को उस समय हुआ जब उन विदेशियों ने देश के विभिन्न भागों में विद्रोह किए , जिन्हें दबा पाना मुहम्मद तुगलक के लिए बहुत कठिन हो गया था ।

मुहम्मद तुगलक की कल्पित योजनाएं

प्रशासनिक अयोग्यता ( Lack of Administrative Abilities )

यह सही है कि मुहम्मद एक विद्वान् व्यक्ति था , परन्तु उसमें प्रशासनिक योग्यता बहुत कम थी नहीं तो वह इस तरह की योजनाएं न बनाता जिन्हें व्यावहारिक रूप देने की उसमें शक्ति नहीं थी । उसकी कोई योजना भी पूर्ण न हुई ।

वह जल्दबाज था ( He was a man of hasty nature )

मुहम्मद बहत ही जल्दबाज़ था ! जो योजना उसके मस्तिष्क में आई उसे वह पकने नहीं देता था और न ही उसके अच्छे बुरे परिणाम पर विचार करता था बल्कि जब भी किसी योजना का विचार आया उसी समय उस पर अमल आरम्भ कर देता था । जब उसमें विफलता नज़र आती तो उसे बीच में ही छोड़ देता था , इसलिए जल्दबाजी में बनाई गई योज नाओं की सफलता की आशा कैसे रखी जा सकती थी ।

वह क्रोधी था ( He was hot – temepered )

मुहम्मद बहुत क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति था । जब उसे अपनी योजनाओं में सफलता नहीं मिलती थी तो क्रोध में आकर वह लोगों को कड़ा दण्ड देना आरम्भ कर देता था ।

विशाल साम्राज्य ( Big Empire )

मुहम्मद तुगलक का साम्राज्य काफी विशाल था । उसमें उत्तरी भारत के अतिरिक्त दक्षिणी भारत के भी कई प्रदेश सम्मिलित थे | इस तरह इतने बडे साम्राज्य के विद्रोहों को दबाना उसके लिए कठिन हो गया था ।

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