Monday , 22 July 2019
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बाबर की काबुल पर विजय

काबुल पर विजय ( The Conquest of Kabul )

बाबर ने मामूली संघर्ष के पश्चात् 1504 ई० में काबुल पर अधिकार कर लिया । प्रसिद्ध इतिहासकार लेनपूल ( Lanepoole ) के अनुसार काबुल की विजय बाबर के जीवन की प्रसिद्ध घटना है । क्योंकि काबुल – विजय के पश्चात् ही वह भारत – विजय की ओर ध्यान दे सका था । काबुल पर बाबर ने 1504 ई० से 1526 ई० तक शासन किया । पहले कुछ वर्षों में बाबर ने कन्धार , हिरात और बदखशां आदि प्रदेशों पर भी अधिकार कर लिया था । इतनी विजयें प्राप्त करने के पश्चात् उसकी आंख समरकंद पर लगी हुई थीं ; इसलिए उसने ईरान के शासक की सहायता से समरकंद पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर लिया । ईरान के शासक के अनुरोध पर बाबर ने शिया धर्म अपना लिया । समरकंद के बहुसंख्यक लोग सुन्नी मत के अनुयायी थे । उन्होंने उबेदुल्ला के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया और बाबर को तीसरी बार समरकंद छोड़ना पड़ा । समरकंद विजय का विचार त्याग कर भारत – विजय की ओर ध्यान दिया ।

बाबर के भारत पर पांच प्रमुख आक्रमण

कुछ समय तो बाबर ने शान्तिपूर्वक शासन किया । उसे अपने प्रारम्भिक जीवन में कई शक्तिशाली जातियों से युद्ध करना पड़ा था ; इसलिए उसे लड़ाई के ढंग तथा कठिन समय पर न घबराने की आदत पड़ गई थी । उसने उज्बेग जाति से तुल्गामा नामक युद्ध – विधि सीखी और ईरानियों व तुर्कों से उसने तोपखाने का प्रयोग सीखा था । इन्हीं विधियों का प्रयोग उसने भारत के विरुद्ध किया था ।

1519 ई० से 1524 ई० तक बाबर ने लगभग 5 बार सिन्ध नदी पार करके भारत की उत्तर – पश्चिमी सीमा के कई प्रदेशों पर आक्रमण किया , परन्तु ये आक्रमण नाममात्र के ही थे क्योंकि बाबर के वहां से चले जाने के पश्चात् शीघ्र ही भारतीय अपने प्रदेशों पर पुनः अधिकार कर लेते थे ।

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