Monday , 22 July 2019
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बाबर के भारत पर प्रमुख आक्रमण

बाबर के भारत पर निम्नलिखित प्रारम्भिक आक्रमण प्रसिद्ध है:-

प्रथम अक्रमण , 1519 ( First Invasion , 1519 )

बाबर ने भारत पर प्रथम आक्रमण 1519 ई० में किया था । उसका मुकाबला युसफजाई जाति ने डटकर किया था , परन्तु बाबर ने उसे बुरी तरह पराजित करके बाजौर पर गोलाबारी करके उसे अपने अधिकार में कर लिया था । इस प्रकार जेहलम नदी के तट पर भेरा पर आक्रमण करके उसे भी अपने साथ मिला लिया । इसके पश्चात् उसने अपना दूत दिल्ली भेजा , परन्तु स्वयं काबुल लौट गया ।

बाबर की काबुल विजय के बारे में

दूसरा आक्रमण , 1519 ( Second Invasion , 1519 )

दूसरी बार फिर 1519 ई० में सितम्बर के महीने में बाबर ने भारत पर आक्रमण किया । वह पेशावर तक पहुंच गया था कि उसे बदखशां में गड़बड़ होने के समाचार मिले । वह वहीं से वापस लौट गया ।

तीसरा आक्रमण , 1520 ( Third Invasion , 1520 )

बाबर ने भारत पर तीसरा आक्रमण 1520 ई० में किया । इस बार उसने बाजौर और भेरा के अतिरिक्त स्यालकोट भी अपने अधिकार में कर लिया । स्यालकोट में बाबर का कोई मुकाबला नहीं हुआ था , परन्तु जब वह आगे सैदपुर ( एमनाबाद ) की तरफ बढ़ा तो वहां के लोगों ने उसका डटकर विरोध किया । बाबर को बहुत क्रोध आया । बाबर ने वहां पर बहुत अत्याचार किए । बहुत से लोग कैदी बना लिये । उनमें गुरुनानक देव जी भी थे । कुछ समय पश्चात् गुरुनानक देव जी की अध्यात्मिक शक्ति देखकर बाबर ने उन्हें छोड़ दिया । उस समय बाबर को काबुल में गड़बड़ के समाचार मिले । वह आगे बढ़ने का विचार त्याग कर वहीं से वापस लौट गया ।

बाबर का समरकन्द को प्राप्त करना

चौथा आक्रमण , 1524 ( Fourth Invasion , 1524 )

बाबर ने दौलत खां लोधी के सन्देश पर भारत पर 1524 ई० में चौथा आक्रमण किया । उसने किसी कठिनाई के बिना ही लाहौर , जालन्धर और दीपालपुर पर अपना अधिकार कर लिया । दौलत खां ने बाबर को संदेश इसलिए दिया था कि बाबर उसे सारे पंजाब का गवर्नर बना देगा , परन्तु उसकी आशाओं के प्रतिकूल उसे केवल जालन्धर और सुल्तानपुर के क्षेत्र ही मिले ; इसलिए उसने विद्रोह कर दिया । इस प्रकार बाबर ने दिल्ली पर आक्रमण का विचार छोड़ दिया । अपनी कुछ सेना लाहौर में छोड़कर वह भारत विजय की तैयारी के लिए फिर काबुल वापस लौट गया ।

पांचवां आक्रमण और पंजाब की विजय , 1525 – ( Fifth Invasion , 1525 )

नवम्बर 1525 ई० में बाबर ने पांचवीं और अन्तिम बार भारत पर आक्रमण किया । इसी विजय के कारण वह भारत विजय में सफल हुआ था । सबसे पूर्व उसे दौलत खां लोधी से लड़ना पड़ा । उसको पता चला कि दौलत खां भारी सेना के साथ बाबर से लड़ने के लिए तैयार है तो बाबर ने दौलत खां पर आक्रमण कर दिया । लाहौर के निकट भयंकर लड़ाई हुई , परन्तु दौलत खां हार गया । दौलत खां को पकड़कर बाबर के सम्मुख पेश किया गया । बाबर ने उस पर दया की और उसे कुछ जागीर दे दी ।

भारत की विजय ( Conquest of India )

बाबर ने 1525 ई० में पांचवीं बार भारत पर आक्रमण किया । दौलत खां लोधी को पराजित किया । 1526 ई० में पानीपत की लड़ाई में विजय प्राप्त की । 1527 ई० में कनवाहा की लड़ाई जीती । 1528 ई० में बाबर ने चदेरी की लड़ाई में विजय प्राप्त की और 1529 ई० में घाघरा की लड़ाई जीतकर भारत – विजय का काम पूरा कर लिया । 1530 ई० में बाबर की मृत्य हो गई ।

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