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बाबर के आक्रमण के समय दक्षिण भारत

बाबर के आक्रमण के समय दक्षिणी भारत की स्थिति

खानदेश ( Khandesh )

खानदेश का राज्य ताप्ती की घाटी में स्थित था और चौदहवीं शताब्दी के अन्तिम दशक में ही स्वतन्त्र हो चुका था । इसके राज्य वंश का संस्थापक मलिक राजा फारूकी ( Malik Raja Faruqi ) था । उसने शान्ति पूर्वक शासन किया और 1399 ई० में उसकी मृत्यु हो गई । उस समय से गुजरात का शासक खानदेश पर अधिकार करने का इच्छुक था ; इसलिए दोनों राज्यों में लगातार युद्ध होते रहे । बाबर के आक्रमण के समय खानदेश में इन निरन्तर युद्धों के कारण अशान्ति तथा अराजकता फैली हुई थी ।

बहमनी राज्य ( The Bahmani Kingdom )

1347 ई० दक्षिण में विख्यात बहमनी ( Bahmani ) राज्य स्थापित हो चुका था । इसकी सीमाएं उत्तर में बरार से लेकर दक्षिण में कृष्णा नदी तक फैली हुई थीं. बाबर के आक्रमण के समय बहमनी राज्य के पांच भाग हो चुके थे — बीजापुर , गोलकुण्डा , बरार , बीदर और अहमदनगर । इसके दक्षिण में विजयनगर राज्य था, जो सदा इन पड़ोसी राज्यों से युद्ध लड़ता रहता था ।

विजय नगर ( Vijaya Nagar )

मुसलमानों के विरोध के बावजूद भी चौदहवीं शताब्दी में विजय नगर का हिन्दू राज्य स्थापित हो चुका था । बाबर के भारत पर आक्रमण के समय इस राज्य पर विख्यात राजा कृष्ण देवराय ( Krishan Dev Rai ) का शासन था । उसका राज्य प्रत्येक दृष्टि से उन्नत तथा समृद्ध था । उस समय के विदेशी यात्री भी उसके राज्य की समृद्धि देखकर आश्चर्यचकित रह जाते थे । उसके अपने राज्य में विशेषतया सांस्कृतिक विकास हुआ था । यह ठीक है कि दक्षिण का यह शक्तिशाली राज्य दिल्ली की राजनीति पर कोई प्रभाव नहीं डाल सकता था , परन्तु उसने दक्षिण में मुसलमानों के विस्तार पर रोक अवश्य लगाई थी ।

उपरोक्त स्थिति से हम भली – भान्ति इस परिणाम पर पहुंच सकते हैं कि भारत उस समय उस फूल की भान्ति था , जो ऊपर से तो एक दिखाई दे , परन्तु भीतर से खण्ड – खण्ड हो । इस तरह की परिस्थितियों में बाबर के लिए भारत पर विजय प्राप्त करना कोई कठिन काम नहीं था ।

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