Tuesday , 16 July 2019
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बाबर के आक्रमण के समय आर्थिक और सामाजिक स्थिति

बाबर के आक्रमण के समय भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिति :

आर्थिक स्थिति ( Economic Condition )

विदेशी लुटेरों को लूट – खसूट के पश्चात् भी हमारे देश में धन – धान्य का बाहुल्य था । यहां की भूमि सोना उगलती थी । यह ठीक है कि अधिक युद्ध होने के कारण फ़सलें नष्ट हो जाती थीं , परन्तु किसानों को उचित प्रोत्साहन दिया जाता था । चारों ओर लहलहाती फ़सले दिखाई देती थीं । हमारे किसान खूब अनाज उगाते थे , जो विदेशों को भी निर्यात किया जाता था ।

देश में भीतरी तथा विदेशों के साथ व्यापार उन्नति के शिखर पर था । भारत का चीन , मलाया , अफ़गानिस्तान , ईरान , तिब्बत तथा भूटान से पर्याप्त व्यापार था । इसमें गृह उद्योग भी होते थे । कपड़ा बुनना , रेशमी कपड़ा , कागज , खांड तथा ऐसी ही और वस्तुएं देश के कई भागों में बनाई जाती थीं । अमीर तथा मध्यवर्गीय लोग ऐश्वर्य भोगते थे । निम्न वर्ग गरीब था , परन्तु वह भी भूखा नहीं मरता था क्योंकि देश में अनाज पर्याप्त होता था ।

मुसलमानी शासन में हिन्दुओं की आर्थिक दशा बहुत कमजोर हो गई थी । उन्हें तो लकड़हारे तथा पानी भरने वाले ( Hewers of wood and drawers of water ) ही बना दिया गया था । वैसे समूचे देश में सोना बहुत था । दिल्ली , आगरा तथा ग्वालियर में ढेरों सोना देखकर बाबर ने कहा था ” भारत की मुख्य विशेषता सोने की राशि है जो सिक्कों तथा बिना सिक्कों के प्राप्त होती है । “

सामाजिक स्थिति ( Social Condition )

बाबर के आक्रमण के समय भारतीय समाज को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है — एक हिन्दू तथा दूसरे मुसलमान । हिन्दू लोग भ्रम जाल में फंसे हुए थे । वे जादू – टोने , पर्दा प्रथा , जाति – पाति , बाल – विवाह तथा सती प्रथा की सामाजिक बीमारियों में ग्रस्त थे ; इसलिए हिन्दू समाज की दशा अच्छी नहीं थी । इसके विपरीत मुसलमान भी शासक वर्ग होने के कारण दोष – युक्त थे । वे जुए तथा शराब पर बहुत जोर देते थे । भोग – विलास तथा ऐश्वर्य के जीवन ने उन्हें उनकी पहले वाली शक्ति से वंचित कर दिया था । इन दोनों जातियों के निजी दोषों के अतिरिक्त उनमें परस्पर वैर – भाव भी मुख्य कमजोरी थी , जिसे भक्ति मार्ग के सन्तों ने दूर करने का प्रयत्न किया ।

सांस्कृतिक दृष्टि से उस समय भारत में पर्याप्त एकता थी । एडवर्ड और गैरट ( Edwards and Garret ) का भी विचार है कि उस समय भारत में राजनीतिक रूप में बहुत खाइयां पड़ी हुई थीं , परन्तु सांस्कृतिक रूप से भारत में पर्याप्त एकता थी । यह एकता भक्ति आन्दोलन का परिणाम था । हिन्दू और मुसलमान एक दूसरे के बहुत समीप हो गए थे ।

इस प्रकार भारत की राजनीतिक , आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति ने बाबर को भारत विजय में बहुत सहयोग दिया । इसलिए यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया जा सकता है कि जिस समय बाबर ने भारत पर आक्रमण किया वह बहुत उपयुक्त अवसर था , जिस में बाबर की विजय अनिवार्य थी ।

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