Tuesday , 16 July 2019
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बाबर का समरकन्द को प्राप्त करना तथा खोना

बाबर का समरकन्द ( उज़्बेकिस्तान ) को प्राप्त करना तथा खोना ( Acquisition and loss of Samar kand )

समरकन्द पर अधिकार करने की बाबर की इच्छा बहुत प्रबल थी ; इसलिए उसने 1497 ई० में समरकन्द पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर लिया । यह स्थान उसके पूर्वज तैमूर की राजधानी थी , केवल सौ दिन के पश्चात् ही उसे समरकंद छोड़ना पड़ा था क्योंकि वहां उसके विरोधियों की संख्या बहुत बढ़ गई थी और बहुत से विद्रोह भी हो चुके थे । इस तरह उसकी अनुपस्थिति में फ़रगाना पर भी उसके सम्बन्धियों ने अधिकार कर लिया था ।

परिणामस्वरूप युवक बाबर को कई वर्ष तक जंगलों में भटकना पड़ा । उसने पुनः साहस किया और 1501 ई० में पुनः समरकंद पर अधिकार कर लिया , परन्तु 1502 ई० सारे – ए – पूल ( Sar – i – Pul ) की लड़ाई में उसके शत्रु शैबानी खां ( Shaibani Khan ) ने उसे हरा दिया । बाबर को न केवल समरकंद ही दूसरी बार छोड़ना पड़ा अपितु उसे अपनी बहिन का विवाह भी शैबानी खां से करना पड़ा । समरकंद छिन जाने के पश्चात् बाबर कुछ समय तक पुनः मारा मारा फिरता रहा और उसे अपनी मातृभूमि पर विजय प्राप्ति की कोई आशा न रही ; इसलिए उसने काबुल की ओर ध्यान दिया , जहां उस समय भारी भगदड़ मची हुई थी ।

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