Wednesday , 24 July 2019
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राष्ट्रीय भावना का विकास

राष्ट्रीय भावना का विकास ( Development of the Spirit of Nationalism )

भगवान् शंकराचार्य ने भारत के चारों सुदूर कोनों में चार मठों की स्थापना की । उत्तर में बद्रीनाथ तो दक्षिण में रामेश्वरम् , पूर्व में जगन्नाथ पुरी तथा पश्चिम में द्वारिका मठ । इन्होंने यह भी प्रतिपादित किया कि प्रत्येक हिन्दू को इन चार मठों की यात्रा करनी चाहिए । ऐसा करते हुए प्रत्येक हिन्दू लगभग सारी भारत भूमि की यात्रा कर लिया करता था ।

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इससे उसके मन में इस समस्त भारत – भूमि से प्रेम तथा अपनत्व की भावना आनी आरम्भ हो गई । उसमें यह भावना पनप उठी कि चारों मठों को आवेष्ठित करने वाली विशाल भूमि उसकी मातृ – देवी है , अतः इसके सम्मान तथा समादर की रक्षा के लिए वह अपना तन – मन – धन बलिदान कर सकता है । यही राष्ट्रवाद की भावना है , जिसका विकास , इस आन्दोलन के कारण हुआ ।

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