Tuesday , 16 July 2019
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पानीपत की पहली लड़ाई

  1. पानीपत की पहली लड़ाई :-

पानीपत की पहली लड़ाई के कारण ( Causes of The First Fight of Panipat )

  1. बाबर एक विशाल साम्राज्य  स्थापित करना चाहता था । पानीपत की लड़ाई का कारण भी उसकी यही इच्छा थी । वह समरकन्द को अपने अधीन न कर सका, इसलिए वह भारत विजय की और उन्मुख हुआ ।
  2. भारत पर आक्रमण करने के लिए बाबर को कई निमन्त्रण भी पहुँच चुके थे । भारत की राजनीतिक स्थिति आक्रमण के अनुकूल थी ।
  3. इब्राहिम लोधी, दौलत खां और आलम खां को जोकि बाबर से जा मिले थे, कड़ा दण्ड देना चाहता था, इसलिए इब्राहिम बाबर से टक्कर लेने का इच्छुक था ।

पानीपत की पहली लड़ाई की घटनाएं ( Events of the first battle of Panipat )

नवम्बर 1525 ई० में बाबर ने पूर्ण तैयारी करके भारत पर आक्रमण कर दिया । पंजाब में दौलत खां लोधी ने उसे रोकना चाहा , परन्तु वह हार गया । उसे बंदी बना लिया गया और  भेरा ( Bhera ) भेज दिया गया , परन्तु वह मार्ग में ही चल बसा । कुछ समय लाहौर में विश्राम करने के पश्चात् बाबर ने दिल्ली की ओर बढ़ना प्रारम्भ किया । उसके साथ केवल 12 , 000 सिपाहीं थे , जिन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया था । वे युद्ध कला में पूर्णतया निपुण थे । इब्राहीम को बाबर की इच्छा का ज्ञान था । उसने भी बहुत सी सेना ( एक लाख सिपाही ) एकत्र की और बहुत से हाथी साथ लेकर मुकाबले के लिए आगे बढ़ा । ।

यह ठीक है कि बाबर की सेना संख्या में इब्राहीम की सेना से बहुत कम थी , परन्तु उसने पानीपत के मैदान में सेना को योजनाबद्ध ढंग से तैनात किया था । उसकी सेना का दायां भाग पानीपत नगर में सुरक्षित था । बाई ओर बहुत सी खंदके खोदी गई थीं और उन्हें वृक्षों से ढक दिया गया था । बाबर ने मध्य भाम में लगभग सात सौ गड्डे ( Wagon Carts ) खड़े कर दिये थे । दो – दो गड्डों के पहियों को चमड़े की रस्सियों से बांध दिया गया था । इनके मध्य लगभग 60 – 70 गज का अन्तर भी छोड़ दिया गया था ताकि 100 या इससे अधिक अश्वारोही वहां से आकर शत्रु का मुकाबला कर सके । इन गाड़ियों के पीछे बन्दूकधारी सैनिक खड़े किए गए थे । इन गाड़ियों के बाएं तथा दाएं केन्द्रों में अपने प्रसिद्ध तोपची मुस्तफा ( Mustafa ) और उस्ताद अली ( Ustad Ali ) को तैनात किया था । इस प्रकार शत्रु पर घेरा डालने के लिए सेना की दाई तथा बाई ओर सभी अश्वारोही खड़े किये गए थे , जो उज्बेगी तुल्गामा ( Tulughama ) युद्ध – पद्धति के अनुसार शत्रु पर पीछे से अच्छी तरह से घेरा डाल सके ।

बाबर के आक्रमण के समय भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति

तोपखाने के पीछे कुछ चुने हुए प्रमुख अश्वारोही थे जिसका नेतृत्व अब्दुल अजीज़ ( Abdul Aziz ) कर रहा था । मध्य में बाबर स्वयं खड़ा था । 21 अप्रैल , 1526 ई० को लगभग एक बजे दोनों सेनाएं आपस में भिड़ गई । इब्राहीम की सेनाएं आगे बढ़ी परन्तु खदकों के निकट आकर रुक गई । दूसरी ओर इब्राहीम के हाथी बाबर के तोप खाने से भयभीत होकर पीछे की ओर भाग खड़े और उन्होंने अपनी ही सेना को कुचलना प्रारम्भ कर दिया । उधर बाबर के अश्वारोहियों ने लोधी सेनाओं पर दोनों ओर से घेरा डाल दिया । सेना में भगदड़ मच गई । आधे दिन में ही लगभग 15 हजार सिपाही पानीपत के मैदान में मृत्यु का ग्रास हो गये । इन में एक इब्राहीम लोधी भी था । बाबर ने स्वयं इस विजय के सम्बन्ध में लिखा है कि ” सर्वशक्तिमान् अल्ला की कृपा से एक कठिन काम भी मेरे लिए आसान हो गया और आधे दिन में ही वह शक्तिशाली सेना नष्ट कर दी गई । “

पानीपत की पहली लड़ाई के परिणाम :-

भारत के इतिहास में पानीपत की पहली लड़ाई का बहुत महत्व है :

  1. इसके परिणाम के सम्बन्ध में डॉ० ईश्वरी प्रसाद ( Dr . Ishwari Parsad ) ने लिखा है , ” पानीपत की लड़ाई ने दिल्ली के साम्राज्य को बाबर के सुपुर्द कर दिया । लोधी वंश की शक्ति छिन्न – भिन्न हो गई और भारत को प्रभसत्ता चगताई तुकों के हाथों में चली गई । “
  2. लोधियों के विनाश पर भारत में मुगलों ने एक नए वंश की आधारशिला रखी ।
  3. दिल्ली के सुलतानों की धार्मिक कट्टरवादिता का अन्त तथा मुगलों की धार्मिक उदारता का युग प्रारम्भ हुआ ।
  4. इस पराजय से भारत में अफगान शक्ति को पर्याप्त आघात पहुंचा । उनकी आंखें खुल गई । इस प्रकार उनमें नया जोश उत्पन्न हुआ ।
  5. बाबर ने आगे बढ़ कर दिल्ली के साथ – साथ आगरा पर भी अधिकार कर लिया ।
  6. बाबर के जीवन पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा । इससे उसका उत्साह बढ़ गया और उसने भारत में स्थायी रूप में रहने का निश्चय कर लिया ।
  7. इस लड़ाई के पश्चात् भारत की आने वाली लड़ाइयों में तोपखाने का प्रयोग होने लगा क्योंकि प्रथम बार भारत में बाबर ने ही तोपखाने का प्रयोग किया था ।

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