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पानीपत की दूसरी लड़ाई

पानीपत की दूसरी लड़ाई, 1556 ( The Second Battle of Panipat ) 

प्रमुख कारण ( Main Cause of Second Battle of Panipat )

पानीपत की दूसरी लड़ाई का मुख्य कारण तो यह था कि बंगाल के बादशाह आदिल शाह के प्रधानमन्त्री हेमू ने दिल्ली तथा आगरा के गवर्नर उज्बेग और तारदी बेग को भगा कर स्वयं दिल्ली व आगरा पर अधिकार कर लिया था । उज्बेग और तारदी बेग भाग कर अकबर के पास पहुंच गये । बैरम खां को बहुत क्रोध आया । उसने तारदी बेग को मृत्यु – दण्ड दिया ।

घटनाएं ( Events )

अकबर दिल्ली तथा आगरा पर अधिकार करने के लिए अपने संरक्षक बैरम खां के साथ सेना लेकर दिल्ली की ओर बढ़ा । हेमू भी अपनी भारी सेना के साथ अकबर का मुकाबला करने के लिए दिल्ली से निकल पड़ा । दोनों सेनाओं की पानीपत के विख्यात मैदान को 15 नवम्बर , 1556 ई. में टक्कर हुई , घमासान युद्ध हुआ । हेमू के पास 3,000 अश्वारोही और 500 लड़ाके हाथी थे । लड़ाई के आरम्भ में हेमू की सेना ने मुग़लों की नाकों मेंं दम कर दिया ।

इसका कारण यह था कि हेमू एक सफल सेनापति था और उसके पास सेना भी मुग़लों से अधिक थी । तत्कालीन इतिहासकार बदाऊनी ( Badauni ) ने लिखा है कि ” हेमू ने एक आक्रमण में अकबर की सेना को छिन्न – भिन्न कर दिया । “ इस प्रकार हेमू को उसकी विजय स्पष्ट दिख रही थी कि अचानक एक तीर उसकी आंख में आकर लगा जिससे वह अचेत हो गया । हेमू के अचेत होने से युद्ध का पासा पलट गया । हेमू की सेना नेताविहीन हो गई थी । उसमें भगदड़ मच गई । इस प्रकार की स्थिति से मुग़ल सेना ने लाभ उठाया और ज़ोरदार धावा बोल कर हेमू की सेना की धज्जियां उड़ा दीं । हेमू को पकड़ लिया गया और उसकी हत्या कर दी गई ।

परिणाम ( Results ) इस लड़ाई के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित थे :-

  1. अकबर का मुख्य शत्रु मारा गया और 17 नवम्बर , 1556 को अकबर का दिल्ली तथा आगरा पर अधिकार हो गया ।
  2. पुनः मुगल साम्राज्य की स्थापना हो गई ।
  3. मुगल सेना की शक्ति की धाक सारे देश में बैठ गई । अफगान सदा के लिए समाप्त हो गए ।
  4. अकबर भारत का सम्राट् बन गया ।
  5. इस लड़ाई से बैरम खां का सम्मान बहुत बढ़ गया । उसकी शक्ति भी बढ़ गई क्योंकि उसके उत्साह और साहस से ही मुगलों ने हेमू जैसे शत्रु को पराजित किया था , इसलिए 1556 से 1560 का समयं बैरम खां का काल ही कहा जाता है ।
  6. इस युद्ध से भारत पर उस व्यक्ति का राज्य हो गया जिसके अन्दर परमात्मा का भय और जनता की भलाई के लिए उत्साह था ।

मुगलों की सफलता के कारण ( Causes of the Success of the Mughals ) पानीपत की दूसरी लड़ाई में मुगलों की सफलता के निम्नलिखित कारण थे :-

  1. अकबर की सेना और हेमू की सेना में जो प्रथम झड़प हुई थी उसमें ही हेमू का तोपखाना जाता रहा था और जब उसको वास्तविक लड़ाई लड़नी पड़ी तो उसके पास तोपखाना नहीं था ।
  2. पानीपत के युद्ध की विजय का श्रेय बैरम खां की वीरता और उसके विशेष अनुभव को दिया जा सकता है । उसके साहस के बिना विजय बहुत कठिन थी ।
  3. मुगल सेना की एकता और उत्साह ने भी यह विजय दिलाई थी । उनको पता था कि पराजित हो कर भी वह जीवित अपने घरों को नहीं पहुंच सकते । इसलिए उन्होंने जी – जान से युद्ध किया ।
  4. भाग्यवश हेमू की आंख में तीर लगा और उसका बेहोश हो जाना भी इस युद्ध की विजय का कारण कहा जा सकता है ।

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