Tuesday , 16 July 2019
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गुलाम वंश या इलवारी वंश

गुलाम वंश या इलवारी वंश [ 1206 – 1290 ] ई. (Stave Ilbari Dynasty)

गुलाम वंश

दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत सर्वप्रथम गुलाम वंश की स्थापना हुई । गुलाम वंश ( या मामलुक वंश ) की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा हुई ।

दिल्ली सल्तनत

कुतुबुद्दीन ऐबक [ 1206 – 1210 ] ई . ( Qutubuddin Aibak )

  • वह लाखों में दान दिया करता था इसलिए उसे लाखबक्श कहा जाता था ।
  • ऐबक ने सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर दिल्ली में कुतुबमीनार का निर्माण करवाया जिसे इल्तुतमिश ने पूरा किया ।
  • उसने दिल्ली में कुव्वत – उल – इस्लाम और अजमेर में अढाई दिन का झोपड़ा नामक मस्जिदों का निर्माण करवाया ।
  • 1210 में चौगान ( पोलो ) खेलते हुए घोड़े से गिरकर ऐबक की मृत्यु लाहौर में हुई ।

इल्तुतमिश [ 1211 – 1236 ] ई . ( lltutmish )

  • उसने दिल्ली को अपनी राजधानी बनवाया ।
  • उसने चालीस गुलाम सरदारों के गुट अर्थात् तुर्कान – ए चिहलगानी के संगठन की स्थापना की ।
  • उसने इक्ता व्यवस्था लागू की ।
  • उसने शुद्ध अरबी सिक्के चलाए । चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल उसी ने आरम्भ किया ।
  • इल्तुतमिश ने कुतुबमीनार के निर्माण कार्य को पूरा करवाया । उसे मकबरा निर्माण शैली का जन्मदाता भी कहा जाता है ।

रजिया 1236 – 1240 ई . ( Razia )

  • दिल्ली सल्तनत के इतिहास में रजिया एकमात्र मुस्लिम महिला शासिका बनी । वह प्रथम तुर्क महिला शासिका भी थी ।
  • 13 अक्टूबर , 1240 ई . को कैथल के निकट कुछ डाकुओं ने रजिया की हत्या कर दी ।

ग्यासुद्दीन बलबन [ 1265 – 12871 ई . ( Ghiyasuddin Balbhan )

  • बलबन ने चालीस तुर्क सरदारों के गुट ‘ तुर्कान – ए चिहलगानी ‘ की समाप्ति की ।
  • बलबन ने कई ईरानी परंपराएँ जैसे – सिजदा ( भूमि पर लेटकर अभिवादन ) एवं पैबोस ( सुल्तान के चरणों को धूमना ) प्रारम् । करवाई ।
  • उसने ईरानी त्योहार नौरोज भी आरभ किया ।

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