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मुहम्मद तुगलक़ का राज्य प्रबन्ध

राज्य का स्वरूप ( Nature of his State )

मुहम्मद तुगलक का राज्य मुस्लिम धार्मिक राज्य था । इसमें नागरिकता के पूर्ण अधिकार केवल मुसलमानों को ही प्राप्त थे । प्रायः मुसलमान सुलतानों का प्रमुख उद्देश्य इस ‘ काफिर भूमि ’ को ‘ इस्लाम भूमि ‘ बनाना ही था , परन्तु इब्न बतूता के अनुसार मुहम्मद तुगलक के राज्य – प्रबन्ध में तो हिन्दुओं को भी उच्च पद पर नियुक्त किया गया था ।

साम्राज्य का प्रबन्ध ( Administration of the Empire )

  1. सुलतान ( Sultan ) — सब से प्रमुख और सभी शक्तियों का स्रोत सुलतान ( मुहम्मद तुगलक ) स्वयं था । वह समस्त प्रबन्ध की धुरी ( Pivot ) था ।
  2. मंत्री ( Ministers ) – सुलतान को प्रत्येक कार्य में परामर्श देने के लिए उसने एक मुख्य मंत्री नियुक्त किया हुआ था l उसे वजीर ‘ कहते थे । इसके अतिरिक्त ‘ दबीर ‘ होते थे जो सुलतान के पत्र – व्यवहार का काम करते थे ।
  3. मुख्य अधिकारी ( Chief Officials ) – मुहम्मद तुगलक के साम्राज्य के निम्नलिखित प्रमुख अधिकारी होते थे :-
  • अमीर – ए – अरज ( Amir – A – Araz ) – इनके पास लोगों के प्रार्थना – पत्र आते थे ।
  • बारबक ( Barbaq ) — इसका कर्तव्य दरबार का प्रबन्ध करना था ।
  • मस्तौफी ( Mastaufi ) – इसका कर्तव्य सेना पर समस्त व्यय का हिसाब किताब रखना होता था ।
  • अरीज – ए – ममालिक ( Ariz – i – Mamalik ) – इसका कार्य सेना की भर्ती करना तथा उसमें वेतन का वितरण करना होता था ।
  • वकील – ए – दर ( Vakil – i – Dar ) – इसका कार्य महल की रक्षा करना होता था ।
  • अमीर – ए – अखूरा ( Amir – EAkhoora ) — यह घुड़शाला का मुख्य अधिकारी था ।
  • अखबार नवीर ( Akhbar Navir ) — यह दरबार के समाचार लिखता था तथा विदेशियों की देख – भाल करता था ।
  • बेर – उल – इसलाम ( Bair – ul – Islam ) – यह मौलवियों , फकीरों तथा दरवेशों का अफसर था ।
  • काजो – उल – कुजात ( Qazi – ul – Quzat ) — यह न्याय विभाग का मुखिया था सभी काज़ी उसके अधीन थे ।

न्याय – प्रबन्ध ( Judicial Administration )

मुहम्मद तुगलक का न्याय प्रबन्ध उच्चकोटि का था । इब्न बतूता लिखता है कि सुलतान को न्याय से बहुत प्रेम था । वह मुफ्तियों और काजियों को न्याय का ठेकेदार नहीं बनने देता था । अमीरों और काजियों के मुकद्दमों की सुनवाई बहुत छोटी अदालतों द्वारा नहीं की जाती थी । उनके मुकद्दमों की सुनवाई एक ‘ मीर दाद ‘ नामक न्यायालय द्वारा की जाती थी । न्याय वितरण में सुलतान मुहम्मद तुगलक इनकी कोई परवाह न करता था ।

सरकारी आय ( Income of the State )

राज्य की आय का प्रमख सो भूमि – कर ही था । इसका भुगतान करना किसानों के लिए अनिवार्य था । इसके अतिरिक्त लूट के माल का है भाग भी सरकार को प्राप्त होता था । सुलतान को निजी जागीरों से भी पर्याप्त आय होती थी । लगान एकत्र करने वाले अधिकारी शिकदार आमिल , दीवान ए – मुसतखरिफ आदि थे ।

प्रान्त ( Provinces )

मुहम्मद तुगलक ने अपने समस्त साम्राज्य को 23 प्रांतों में विभक्त किया हुआ था । प्रत्येक प्रान्त का मुखिया ‘ गवर्नर ‘ होता था जिसे ‘ नायब सुलतान ‘ ( Naib Sultan ) कहा जाता था । उसे अपने प्रदेश में प्रशासन को सुचारू ढंग से चलाने से लिए विस्तृत शक्तियां प्राप्त थीं ।

सैनिक प्रबन्ध ( Military Administration )

मुहम्मद तुगलक के पास एक विशाल सेना थी । उसकी सेना में विस्तृत संख्या में घुड़सवार , 3,000 हाथी तथा 20,000 तुर्क सिपाही थे । सैनिकों तथा सनिक अफसरों को बहुत अच्छे वेतन दिए जाते थे ।

डाक विभाग ( Postal Department )

सरकारी डाक को एक स्थान से दुसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए डाक विभाग की व्यवस्था थी । डाक ले जाने वाले हरकारे पैदल तथा घोड़ों पर भी जाते थे ।

दास प्रथा ( Slave System )

मुहम्मद तुगलक ने बहुत संख्या में दास रखे हुए थे । प्रत्येक दास को दो मन चावल और आटा तथा तीन सेर मांस प्रतिमास मिलता था । दास घरेलू नौकरों के रूप में रखे जाते थे अथवा उन्हें गुप्तचर विभाग में भी कर लिया जाता था ।

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