Wednesday , 24 July 2019
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सविनय अवज्ञा आन्दोलन

सिविल ना – फरमानी या सविनय अवज्ञा आन्दोलन ( Civil Disobedience Movement )

साइमन कमीशन की रिपोर्ट 1930 ई० में छपी , किन्तु उससे भारतीयों को कड़ी निराशा हुई क्योंकि उसमें उत्तरदायी सरकार बनाने के लिए साफ इन्कार था , इसलिए गांधी जी ने एक और आन्दोलन जिसे ‘ सविनय आज्ञा – भंग ‘ आन्दोलन कहा गया आरम्भ कर दिया । इसमें गांधी जी ने लोगों को शान्ति से कानून तोड़ने के लिए कहा था । इस आन्दोलन का आरम्भ गांधी जी ने स्वयं किया । उन दिनों नमक पर कर लगा था , इसलिए गांधी जी ने अहमदाबाद की ओर समुद्री किनारे पर स्थित डांडी ( Dandi ) के स्थान पर स्वयं नमक तैयार करके सरकार के नमक कानून को तोड़ा था । इसके बाद जंगल की आग की तरह यह आन्दोलन सारे देश में फैल गया । स्थान – स्थान पर सरकारी कानून तोड़े जा रहे थे ।

सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए यत्न किए । लगभग साठ हजार व्यक्तियों को कैद भी कर लिया गया । गांधी जी पकड़ लिए गए । आन्दोलन तब भी न दबा । तब सरकार ने नर्म नीति अपनाई । गांधी जी से बातचीत आरम्भ की 1931 ई० को गांधी – इरविन पैक्ट ( Gandhi – Irwin Pact ) हो गया । इसके साथ ही गांधीजी ने यह आन्दोलन कुछ समय के लिए बन्द कर दिया तथा दूसरी गोलमेज़ कांफ्रेंस में जाना स्वीकार कर लिया ।

जानिये रौलेट एक्ट कब पास हुआ

गांधी जी दूसरी कांफ्रेंस के लिए लंदन गए , किन्तु वहीं यह भी निश्चय न हो सका कि चुनाव संयुक्त ( मिले – जुले ) हो या अलग – अलग जातियों के हों तथा किस जाति को कितनी सीटें दी जाएं ; इसलिए गांधी जी को खाली हाथ लौटना पड़ा । इधर सरकार ने भारत में बड़ी कठोर नीति अपना रखी थी , इसलिए गांधी जी ने फिर सविनय अवज्ञा आन्दोलन ( Civil Disobedience Movement ) शुरू कर दिया । अंग्रेज सरकार ने इसे कुचलने के लिए प्रत्येक सम्भव प्रयत्न किया । गांधी जी कैद कर लिए गए । देश भर में एक लाख बीस हजार व्यक्ति और भी कैद किए गए । सरकार को इस से भी सन्तुष्टि न हुई ।

उसने 1932 ई० में कम्यूनल एवार्ड ( Communal Award ) के द्वारा हरिजनों को हिन्दुओं से अलग करके अलग प्रतिनिधि भेजने की आज्ञा दे दी । इस पर गांधी जी बड़े दुःखी हुए । उन्होंने जेल में ही मरण – व्रत रख लिया । अन्त में पूना – पैक्ट ( Poona – Pact ) के अनुसार हिन्दुओं तथा हरिजनों ने इकट्ठे प्रतिनिधि भेजने स्वीकार कर लिए । भारत के गवर्नर – जनरल ने भी यह मान लिया । इसके बाद गवर्नमैंट ऑफ इण्डिया एक्ट , 1935 ई० ( Government of India Act of 1935 ) पास हुआ । उससे काफी सुधार मिल गए , जिन्हें गांधी जी ने परखना था कि इन में वास्तव में भारतीयों को क्या मिला है ।

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