Wednesday , 24 July 2019
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जलियांवाला बाग हत्याकांड

जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड ( Jalliailwala Bagh Tragedy )

इधर 1919 ई० के रौलेट एक्ट से भारतीयों में और भी रोष फैल गया । इसके विरुद्ध गांधी जी ने सत्याग्रह आरम्भ कर दिया । सारे देश में गड़बड़ी मच गईं । हड़ताले हुई , जलसे तथा सभाएं हुई । बड़े – बड़े जलूस भी निकाले गए । इस तरह पंजाब के प्रमुख कांग्रेसी नेताओं डाक्टर सत्य पाल ( Dr. Satya Pal ) तथा डाक्टर किचल ( Dr . Kitchlu ) को पकड़ लिया गया । इनके पकड़े जाने पर लगभग बीस हजार भारतीयों ने अमृतसर के जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल , 1919 ई० को एक भारी जलसा किया ।

शान्तिपूर्वक हो रही संशा पर जनरल डायर ( General Dyer ) ने गोलियों की वर्षा की । अनेकों भारतीय शहीद हो गए तथा असंख्य घायल हो गए । इसके बाद सारे पंजाब में बहुत ही अत्याचारी शासन स्थापित हुआ । मार्शल – ला लागू कर दिया गया । गांधी जी भी कैद कर लिए गए ; पर शीघ्र ही उन्हें छोड़ दिया गया ।

जानिये असहयोग आन्दोलन के बारे में

वह जब जेल से बाहर आए तो उन्होंने जलियांवात के बाग हत्याकांड तथा मार्शल – ला के विरुद्ध अपनी आवाज उठाई । इन्होंने अपने साथ मौलाना भाइयों को भी मिला लिया । ये मौलाना भाई थे – मुहम्मद अली तथा शौकत अली , जिन्होंने खिलाफत आन्दोलन शुरू किया था । इस प्रकार 1920 ई० में असहयोग आन्दोलन आरम्भ हो गया ।

इस आन्दोलन के अधीन हजारों व्यक्तियों ने अपनी सरकारी नौकरियां छोड़ दी , अपने खिताब सरकार को वापस कर दिए । विद्यार्थियों ने कालिज छोड़ दिए । वकीलो ने वकालत का त्याग कर दिया । यह आन्दोलन बढ़ता चला जा रहा था । सरकार ने इसे दबाने के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया । इसके लिए लगभग 30 हज़ार व्यक्ति पकड़ लिए गए । गांधी जी ने लोगों को शान्त रहने की शिक्षा दी , पर लोग शांत न रह सके ।

1922 ई० को चौरी – चौरा ( Chauri Chaura ) में थाना फूक दिया गया । गांधी जी बहुत दुःखी हुए । उन्होंने हार कर 1992 ई० में अपना आन्दोलन वापस ले जिया पर शीघ्र ही गांधी जी को पकड़ कर छ : साल के लिये जेल भेज दिया गया ताकि लोगों का उत्साह मन्द हो जाए ।

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