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अकाल नीति

अकाल नीति

1769 से 1770 ई . के बीच पड़े भीषण अकाल ने बंगाल की एक – तिहाई जनसंख्या को कालकलवित कर दिया । मगर कम्पनी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया . हालाँकि कम्पनी ने 1860 ई . में दिल्ली के आस – पास के क्षेत्रों में पटने वाले अकाल की जाँच के लिए स्मिथ समिति की नियुक्ति की थी , परन्तु इससे कोई विशेष परिणाम नहीं निकला । ब्रिटिश सरकार ने इसी क्रम में आगे भी कई आयोग एवं समितियों का गठन किया , किन्तु गम्भीर प्रयासों का सर्वदा अभाव रहा ।

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1883 ई . में केन्द्र सरकार ने अकाल संहिता को भी लागू किया , किन्तु कृषि के विकास के अभाव एवं आवृत्ति को कम करने के गम्भीर प्रयास स्वतन्त्रता के बाद ही प्रारम्भ किए गए । सरकार ने अकाल की समस्या से निपटने के लिए स्मिथ समिति ( 1860 – 61 ) ; कैम्पबेल आयोग ( 1866 – 67 ) ; स्ट्रेची आयोग ( 1879 – 80 ); लायल आयोग ( 1897 ) ; मैकडोनॉल्ड आयोग ( 1900 ) तथा जॉन वुडहेड आयोग ( 1945 ) का गठन किया था ।

प्रमुख आयोग / समितियाँ

आयोग / समिति संबंधित वर्ष क्षेत्र
अमीनी समिति 1778 भू – राजस्व एवं अकाल
निकोल्सन आयोग 1892 सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली
दत्ता समिति 1905 कीमतों में उतार – चढ़ाव
मैक्लागन समिति 1915 सहकारी संस्थाओं से सम्बन्धित
हॉलैण्ड समिति 1916 उद्योगों का विकास
मेस्टन आयोग राजस्व की विभिन्न मदों का त्याग करने पर बल
लिनलिथगो आयोग 1928 भारतीय कृषि की स्थिति
मैक्सवेल ब्लूमफील्ड समिति 1928 बारदोली कृषक आन्दोलन पुनर्मूल्यांकन
ह्विटले आयोग 1929 श्रमिकों से सम्बन्धित
सप्रू समिति 1934 मध्यमवर्गीय बेकारी की जाँच
नियेमर समिति 1936 केन्द्र तथा राज्यों के बीच वित्तीय सम्बन्ध
फ्लाउड आयोग 1940 कृषि सम्बन्धी

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