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प्राग की सन्धि

प्राग की सन्धि ( Treaty of Prague )

प्राग की सन्धि 23 अगस्त , 1866 ई० को हुई । इस के अनुसार जर्मनी का राज्य – संघ ( Confedration Germany ) भंग कर दिया गया । आस्ट्रिया का प्रभाव जर्मनी से समाप्त हो गया । वेनीशिया विक्टर इमनुएल को दे दिया गया । शैल्जविग और होल्स्टीन की डचियाँ प्रशा में सम्मिलित कर दी गई । आस्ट्रिया को क्षतिपूर्ति के लिए चार करोड़ रुपया देना पड़ा तथा प्रशा द्वारा की गई जर्मनी की पुन व्यवस्था स्वीकार करना पड़ी । मेन नदी ( Main River ) के उत्तर में स्थित 20 जर्मन रियासतों का एक उत्तरी जर्मन संघ ( North German Confederation ) बनाया गया जिसका प्रधान प्रशा का सम्राट् हुआ और उसकी सहायतार्थ द्वि – सदनीय व्यवस्थापिका सभा स्थापित की गई । इस सभी के एक सदन को बुण्डेस्राथ ( Bundesrath ) और दूसरे सदन को रीस्टाग ( Reichistag ) कहा जाता है ।

जर्मनी की कुछ उत्तरी रियासत जैसे नासु , फ्रैंकफर्ट , हैनोवर , होल्स्टीन ( Nassau , Frankfurt , Hanover , Holstein ) इत्यादि ने आस्ट्रिया का साथ दिया था । अतः बिस्मार्क ने इन्हें प्रशा में मिला लिया । इस प्रकार पचास लाख जनता और 27 हजार वर्ग मील भूमि प्रशा को आस्ट्रिया से मिली । अब जर्मनी का 2/5 भू भाग और उसकी 2/3 जनसंख्या प्रशा के अधिकार में आ गई और जर्मनी का राज्य बहुत छोटा हो गया । प्रशा का राज्य जर्मनी के उत्तर तक फैल गया । जर्मनी के दक्षिणी राज्य बवेरिया वर्टम्बर्ग , बादन और हेस् ( Bayeria , Wurtumburg , Badenand , Hesse ) को अपना पृथक् संघ बनाने की स्वतंत्रता मिली ।

प्राग की सन्धि के अनुसार आस्ट्रिया ने हंगरी के प्रदेश को स्वतंत्रता प्रदान की । इस प्रकार आस्ट्रिया की संरक्षता में हंगरी के स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण हुआ । आस्ट्रिया – हंगरी के संयुक्त राष्ट्र का अध्यक्ष आस्ट्रिया का सम्राट् माना गया तथा दोनों राष्ट्रों के वैदेशिक युद्ध और अर्थविभाग एक में रखे गये । आस्ट्रिया हंगरी का यह समझौता प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तक बना रहा था । इसे इतिहास में Ausgleich कहते हैं ।

प्राग की सन्धि से जर्मन में आस्ट्रिया का प्रभाव नष्ट हो गया और प्रशा को सैनिक शक्ति को महानता प्राप्त हुई । अब प्रशा में बिस्मार्क का गौरव बढ़ गया और उसने जर्मनी के एकीकरण का उत्तरदायित्व अपने ऊपर ले लिया ।

प्राग की सन्धि आस्ट्रिया के लिये बहुत ही अपमानजनक थी । उसे हंगरी का प्रदेश स्वतन्त्र करना पड़ा और उसके अन्तर्राष्ट्रीय गौरव को बहुत धक्का लगा । यद्यपि आस्ट्रिया की हार हुई । फिर भी बिस्मार्क ने आस्ट्रिया के साथ शत्रुता का व्यवहार नहीं किया । उसने वियेना पर आक्रमण करने से इन्कार कर दिया तथा कई अन्य मामलों में आस्ट्रिया के साथ उदारतापूर्ण व्यवहार किया । सभ्भवतः इसका कारण यह था कि सेडोवा के युद्ध के पश्चात् बिस्मार्क यह समझने लगा था कि उसे निकट भविष्य में फ्राँस से भी युद्ध करना पड़ेगा , क्योंकि वहाँ का शासक नैपोलियन तृतीय प्रशा की बढ़ती हुई शक्ति से ईष्र्या कर रहा था । बिस्मार्क यह चाहता था कि फ्रांस के भावी युद्ध में अस्ट्रिया फ्राँस का साथ न देकर प्रशा का साथ दे । इसी कारण उसने अपने पराजित शत्रु , आस्ट्रिया के साथ उदारतापूर्ण व्यवहार किया ।

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