Tuesday , 16 July 2019
Home / सामान्य ज्ञान / हरियाणा की फसलें

हरियाणा की फसलें

हरियाणा की फसलें

फसलें

हरियाणा राज्य एक कृषि प्रधान राज्य है और राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार यहां की जाने वाली कृषि की है। राज्य की तीन चौथाई से अधिक जनसंख्या गांव में निवास करती है और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करती है। राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 16.3% है।

हरियाणा को तो कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है
( i ) उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र मुख्यतः चावल, गेहूं, सब्जियां आदि हेतु उपयुक्त।
( ii ) दक्षिण पश्चिमी क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद, उष्णकटिबंधीय फलों, सब्जियों जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों के उत्पादन हेतु उपयुक्त ।

राज्य की प्रमुख फसलें – हरियाणा की फसलें
राज्य में मुख्य रूप से दो प्रकार की फसलें पैदा की जाती हैं- रबी और खरीफ।

रबी फसलें
इन फसलों को स्थानीय भाषा में आषाढ़ी फसल भी कहा जाता है। इन फसलों को अक्टूबर नवंबर महीने में बोया जाता है तथा अप्रैल-मई में काट लिया जाता है।

गेहूं
हरियाणा में देश के कुल गेहूं का उत्पादन 12% गेहूं पैदा होता है इसका उत्तर प्रदेश में पंजाब के बाद तीसरा स्थान है राज्य में गेहूं उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हिसार सिरसा भिवानी व जींद है वर्ष 2011 से 12 मी राज्य में गेहूं का उत्पादन विशुद्ध 3119 हजार टन रहा।

जौ
जौ की फसल हिसार, सिरसा, रोहतक, सोनीपत, जींद, भिवानी, करनाल, महेंद्रगढ़, फरीदाबाद आदि क्षेत्र में उगाई जाती है।

कपास
हरियाणा का कपास उत्पादन में चौथा स्थान है । राज्य में कपास उत्पादन जिला हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद, रोहतक आदि हैं।

हरियाणा की प्रमुख ऋतुएँ

चना
चने की फसल भिवानी, हिसार, सिरसा, महेंद्रगढ़, रोहतक आदि क्षेत्र में उगाई जाती है। यह पश्चिमी क्षेत्रों में पाई जाती है। वर्ष 2011-12 के दौरान राज्य में लगभग 10 लाख 30 हजार टन चने का उत्पादन हुआ।

दलहन
वर्ष 2011-12 में दलहन का कुल उत्पादन लगभग 8 हजार टन हुआ। तिलहन व दलहनी फसलें भिवानी, हिसार, महेंद्रगढ़, रोहतक, रेवाड़ी, सिरसा, जींद, गुड़गांव, सोनीपत आदि क्षेत्रों में उगाई जाती है।

खरीफ

इन फसलों को सावनी फसल भी कहा जाता है। इन फसलों को जुलाई के प्रारंभ में बोया जाता है तथा सितम्बर में काट लिया जाता है।

मकका
इस फसल में जल की बहुत कम आवश्यकता होती है । इसकी खेती अम्बाला , यमुनानगर , पंचकुला , रोहतक जिलों में पाई जाती है । वर्ष 2011 – 12 में इसका कुल उत्पादन 24 हजार टन हुआ ।

बाजरा
इसकी बुवाई सिंचित क्षेत्रों के मध्य जुलाई में तथा गैर – सिंचित क्षेत्रों में प्रथम मानसूनी वर्षा के बाद की जाती है । इसकी खेती सिरसा , हिसार , फतेहाबाद एवं फरीदाबाद में होती है ।

ज्वार
ज्वार – गर्म और शुष्क भागों में साधारण वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है । उत्पादन की दृष्टि से सिरसा , महेन्द्रगढ़ , भिवानी , जीन्द जिले प्रमुख हैं ।

चावल
पूर्व में यहाँ चावल का उत्पादन आंशिक होता था । राज्य गठन के समय से वर्तमान समय तक चावल के उत्पादन में 12 गुना वृद्धि हुई है , जो इस राज्य में अब बेहद लोकप्रिय खाद्य फसल है । राज्य में चावल उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं — करनाल , कैथल , कुरुक्षेत्र , अम्बाला , जीन्द , सोनीपत , हिसार । राज्य का करनाल जिला बासमती चावल के उत्पादन में विश्व प्रसिद्ध होने के कारण चावल का कटोरा नाम से जाना जाता है । वर्ष 2011 – 12 में राज्य में चावल का उत्पादन 3757 हजार टन रहा ।

Check Also

जल के गुण

जल एक रसायनिक पदार्थ है जिसका रसायनिक सूत्र H2O है: जल के एक अणु में दो हाइड्रोजन के परमाणु सहसंयोजक बंध के द्वारा एक ऑक्सीजन के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *