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ज्वालामुखी

ज्वालामुखी

ज्वालामुखी ( Volcano ) भू – पटल पर वह प्राकृतिक छद या दरार है , जिससे होकर पृथ्वी का पिघला पदार्थ लावा , राख , भाप तथा अन्य गैसें बाहर निकलती हैं । बाहर हवा में उड़ा हुआ लावा शीघ्र ही ठंडा होकर छोटे ठोस टुकड़ों में बदल जाता है , जिसे सिंडर कहते हैं । विस्फोट में निकलने वाली गैसों में वाष्प का प्रतिशत सर्वाधिक होता है । विस्फोट अवधि अनुसार ज्वालामुखी तीन प्रकार की होती है ।

इसके दो रूप हैं —
आभ्यान्तरिक ( Intrusive ) और बाह्य ( Extrusive )

आभ्यान्तरिक क्रिया में पिघला पदार्थ ( लावा ) धरातल के नीचे ही जमकर ठोस रूप धारण कर लेता है , जिनमें बैथोलिथ , लैकोलिथ , सिल तथा डाइक प्रमुख हैं । बाह्य क्रिया में धरातलीय प्रवाह के रूप में लावा का जमकर ठोस रूप लेना , गर्म जल के झरने और गैसों का उत्पन्न होना प्रमुख हैं ।

ज्वालामुखीज्वाला मुखी शंकु के शीर्ष पर एक विदर ( क्रेटर ) ( Crater ) होता है , जिसका आकार कीप ( Funnel ) जैसा होता है । ज्वालामुखी के शान्त होने के बाद इसमें जल भर जाता है , जिसे क्रेटर झील ( Crater Lake ) कहते हैं ।

भूकम्प के प्रकार

ज्वालामुखी के प्रकार
सक्रिय ज्वालामुखी ( Active volcano )
इसमें अक्सर विस्फोट होता है । वर्तमान समय में विश्व में सक्रिय ज्वालामुखियों की संख्या 500 है । इनमें प्रमुख है , इटली का एटना तथा स्ट्रोम्बोली । मैक्सिको ( उत्तर अमेरिका ) में स्थित कोलिमा ज्वालामुखी बहुत ही सक्रिय ज्वालामुखी है । इसमें 40 बार से अधिक बार विस्फोट हो चुका है ।
सिसली द्वीप का स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी प्रत्येक 15 मिनट बाद फटता है । इसे भूमध्य सागर का प्रकाश स्तम्भ ( Light House of the Mediterranean ) कहा जाता है ।

प्रसुप्त ज्वालामुखी ( Dormant Volcano )
इसमे दीर्घकाल से उद्भेदन ( विस्फोट ) नहीं हुआ होता , किन्तु इसकी सम्भावनाएँ बनी रहती हैं । ये जब कभी अचानक क्रियाशील हो जाते हैं , तो जन – धन की अपार क्षति होती है । इसके मुख से गैसें तथा वाष्प निकलती है । इटली का विसूवियस ज्वाला मुखी कई वर्ष तक प्रसुप्त रहने के पश्चात् वर्ष 1931 में अचानक फूट पड़ा ।

शान्त ज्वालामुखी ( Extinct volcano )
ऐसा ज्वाला मुखी जिसमें ऐतिहासिक काल से कोई विस्फोट नहीं हुआ है और जिसमें पुनः विस्फोट होने की संभावना नहीं हो । इसका मुख मिट्टी , लावा आदि पदार्थों से बन्द हो जाता है और मुख का गहरा क्षेत्र कालान्तर में झील के रूप में बदल जाता है , जिसके ऊपर पेड़ – पौधे उग आते हैं ।
इसके उदाहरण हैं — कोह सुल्तान एवं देमवन्द ( ईरान ) , पोपा ( म्यांमार ) , किलीमंजारो ( अफ्रीका ) , चिम्बराजो ( दक्षिण अमरीका ) ।

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