Thursday , 23 May 2019
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प्रिंटर

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प्रिंटर एक मुख्य आउटपुट डिवाइस है । इसके द्वारा प्रिण्टेड कॉपी या हार्ड कॉपी कागज पर प्राप्त की जाती है । इसे स्थायी दस्तावेज ( Permanent Document ) तैयार करने के लिए उपयोग में लाया जाता है ।

कम्प्यूटर प्रिंटर को मुख्यत : तीन समूहों में बाँटा जाता है :-
( 1 ) कैरेक्टर प्रिंटर ( Character Printer )
इससे एक बार में एक कैरेक्टर प्रिण्ट होता है । इसे सीरियल प्रिंटर भी कहा जाता है । कैरेक्टर प्रिंटर 200 – 245 कैरेक्टर / सेकण्ड की गति से प्रिण्ट करता है ।
( ii ) लाहन प्रिंटर ( Line Printer )
इससे एक बार में एक लाइन प्रिण्ट होती हैं । यह तीव्र गति से कार्य करता है । लाइन प्रिंटर 200 – 2000 कैरेक्टर / मिनट की गति से प्रिण्ट करता है ।
( iii ) पेज प्रिंटर ( Page Printer )
यह प्रिंटर एक बार में पूरा पेज प्रिण्ट करता है । यह विशाल डाटा का प्रिण्ट लेने में सक्षम है ।

प्रिंटर के प्रकार ( प्रिंटिंग के पैटर्न के अनुसार )

( a ) इम्पैक्ट प्रिंटर ( Impact Printer )
इसके द्वारा कागज , रिबन तथा कैरेक्टर तीनों पर एक – साथ चोट कर डाटा प्रिण्ट किया जाता है । इम्पैक्ट प्रिंटर भी कई प्रकार के होते हैं-

( i ) डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर ( Dot Matrix Printer )
यह एक कैरेक्टर प्रिण्टर है जिसमें एक प्रिण्ट हैड होता है , जो आगे – पीछे तथा ऊपर – नीचे घूमता है । यह स्याही लगे रिबन पर चोट कर प्रिंट करता है । यह 80 कॉलम तथा 132 कॉलम दो तरह की क्षमताओं का होता है । इसमें प्रिण्टिग खर्च बाकी प्रिण्टरों की अपेक्षा कम पड़ता है , लेकिन प्रिण्ट की गुणवत्ता और स्पीड दूसरे प्रिण्टर की अपेक्षा अच्छी नहीं होती । इसमें एक बार में केवल एक रंग का प्रिण्ट लिया जा सकता है । इसीलिए इसे मोनो प्रिण्टर भी कहा जाता है । इसकी क्षमता को डी . पी . आई . ( Dots Per Inch ) में मापा जाता है ।

( ii ) डेजी व्हील प्रिण्टर ( Daisy Wheel Printer )
इस कम्प्यूटर प्रिण्टर में प्रिण्ट हैड की जगह डेजी व्हील लगा होता है जो प्लास्टिक या धातु का बना होता है । व्हील के बाहरी छोर पर अक्षर बने होते हैं । एक अक्षर को प्रिण्ट करने के लिए डिस्क को घुमाना पड़ता है , जब तक पेपर तथा अक्षर सामने न आ जाएँ । तब हैमर व्हील पर चोट करता है तथा अक्षर रिबन पर चोट कर कागज पर एक अक्षर प्रिण्ट करता है । ग्राफ या चित्र प्रिण्ट नहीं किया जा सकता है । यह शोर तथा घीमी छपाई करने वाली युक्ति है ।

( b ) नॉन – इम्पैक्ट प्रिण्टर ( Non – Impact Printer )
यह प्रिण्टर ध्वनि उत्पन्न नहीं करता है क्योंकि इसमें प्रिण्टिंग हैड कागज पर चोट नहीं करता है । नॉन – इम्पैक्ट प्रिण्टर भी कई प्रकार के होते हैं-

( i ) इंकजेट प्रिण्टर ( Inkjet Printer )
यह नॉन – इम्पैक्ट कैरेक्टर प्रिण्टर है । यह इंकजेट तकनीक पर कार्य करता है । ये दो प्रकार के होते हैं – मोनो और रंगीन । इसमें स्याही के लिए कार्टरिज ( cartridge ) को लगाया जाता है । स्याही को जेट की सहायता से छिड़ककर कैरेक्टर तथा चित्र प्राप्त होता है । इसकी गुणवत्ता तथा स्पीड दोनों कम होते हैं तथा इसमें प्रिण्टिग खर्च भी ज्यादा आता है ।

( ii ) लेजर प्रिण्टर ( Laser Printer )
यह तीव्र गति से प्रिंट करने वाला पेज प्रिण्टर है । लेजर प्रिण्टर में लेजर बीम की सहायता से ड्रम पर आकृति बनती है । लेजर ( बीम ) ड्रम पर डालने के फलस्वरूप विद्युत चार्ज हो जाता है । तब ड्रम को टोनर में लुढ़काया जाता है , जिससे टोनर ड्रम के चार्ज भागों पर लग जाता है । इसे ताप तथा दबाव के संयोजन से कागज पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है जिससे प्रिण्ट प्राप्त होता है । यह थर्मल तकनीक पर काम करता है । ये दो प्रकार के होते है – मोनो और स्मीन । इसकी गुणवत्ता और स्पीड दोनो बाकी प्रिण्टरों की तुलना में काफी बेहतर होती है ।

( iii ) थर्मल प्रिण्टर ( Thermal Printer )
इसमें थर्मोक्रोमिक ( Thermochromic ) कागज का उपयोग किया जाता है। जब कागज थर्मल प्रिण्ट हैड से गुजरता है तो कागज के ऊपर स्थित लेप ( coating ) उस जगह काला हो जाता है जहाँ यह गर्म होता है तथा प्रिण्ट प्राप्त होता है । यह डॉट मैट्रिक्स प्रिण्टर की तुलना में तीव्र तथा ध्वनिरहित होता है । इसमें प्रिण्ट की गुणवत्ता अच्छी होती है ।

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