Friday , 19 July 2019
Home / कंप्यूटर ज्ञान / नेटवर्क टोपोलॉजी

नेटवर्क टोपोलॉजी

नेटवर्क टोपोलॉजी ( Network Topology )
नेटवर्क टोपोलॉजी नेटवर्क के विभिन्न नोड या टर्मिनल को आपस में जोड़ने का एक तरीका है । यह नेटवर्क की भौतिक संरचना को व्यक्त करता है ।

network topology

मुख्य नेटवर्क टोपोलॉजी ( Main Network Topology )
स्टार टोपोलॉजी ( Star Topology )
इसमें किसी एक नोड को होस्ट नोड या केन्द्रीय हब ( Host Node or Central Hub ) का दर्जा दिया जाता है । अन्य कम्प्यूटर या नोड आपस में केन्द्रीय हब द्वारा ही जुड़े रहते हैं । इसमें विभिन्न नोड या टर्मिनल आपस में सीधा संपर्क न करके होस्ट कम्प्यूटर द्वारा संपर्क स्थापित करते हैं । इसमें n जोड क़ो आपस में जोड़ने के लिए n – 1 संचार लाइनों की आवश्यकता होती है । किसी एक नोड या केबल में त्रुटि से नेटवर्क का शेष हिस्सा अप्रभावित रहता है । नया नोड जोड़ने का नेटवर्क पर प्रभाव नहीं पड़ता । केन्द्रीय हब में त्रुटि आने पर पूरा नेटवर्क प्रभवित होता है ।

बस टोपोलॉजी ( Bus Topology )
इसमें एक केबल , जिसे ट्रांसमिशन लाइन ( Transmission line ) कहा जाता है , द्वारा सारे नोड जुड़े रहते हैं । किसी एक स्टेशन द्वारा संचारित डाटा सभी नोड्स द्वारा ग्रहण किये जा सकते है । इस कारण इसे ब्रॉडकास्ट नेटवर्क ( Broadcast Network ) भी कहते हैं । डाटा को पैकेट में भेजा जाता है जिसमें विशेष एड्रेस रहता है । कम्प्यूटर नोड्स इस एड्रेस को पढ़कर अपने लिए बने डाटा को ग्रहण करते हैं । लैन ( LAN ) में मुख्यतः यही टोपोलॉजी प्रयोग की जाती है । इसमें कम केबल की आवश्यकता पड़ती है । अत : इसमें खर्च कम आता है । किसी एक कम्प्यूटर में त्रुटि होने पर पूरा नेटवर्क प्रभावित नहीं होता है । नया नोड जोड़ना आसान होता है । ट्रांसमिशन लाइन में त्रुटि होने पर सारा नेटवर्क प्रभावित होता है । इसमें एक बार में केवल एक ही नोड डाटा संचारित कर सकता है । प्रत्येक नोड को विशेष हार्डवेयर की आवश्यकता पड़ती है ।

रिंग टोपोलॉजी ( Ring Topology )
सभी नोड एक – दूसरे से रिंग या लूप ( Ring or Loop ) में जुड़े होते हैं । बस टोपोलॉजी के दो अंत बिन्दुओं को जोड़ देने से रिंग टोपोलॉजी का निर्माण होता है । प्रत्येक नोड अपने निकटतम नोड से डाटा प्राप्त करता है । यदि वह डाटा इसके लिए है , तो वह उसका उपयोग करता है , अन्यथा उसे अगले नोड को भेज देता है । प्रत्येक नोड के साथ रिपीटर ( Repeater ) लगा रहता है , जो सूचनाओं को पुनः प्रेषित कर सकता है । इसमें सूचनाओं का संचरण एक ही दिशा में होता है । इसमें केन्द्रीय कम्प्यूटर की आवश्यकता नहीं पड़ती । दो कम्प्यूटरों के बीच केबल में त्रुटि से दूसरे मार्ग द्वारा संचार संभव हो पाता है । संचार की गति नेटवर्क में लगे कम्प्यूटरों की संख्या तथा संरचना से प्रभावित होती है । किसी एक स्थान पर रिपीटर में त्रुटि होने पर पूरा नेटवर्क प्रभावित होता है । इसके संचालन में जटिल सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है ।

मेस नेटवर्क ( Mesh Network )
यह नेटवर्क उच्च ट्रैफिक स्थिति में मार्ग ( Routes ) को ध्यान में रखकर उपयोग किया जाता है । इसमें किसी भी स्रोत ( Source ) से कई मार्गों से संदेश भेजा जा सकता है । पूर्णत : इन्टरकनेक्टेड मेस नेटवर्क खर्चीला है , क्योंकि इसमें ज्यादा केबल ( Cable ) तथा हर नोड में इंटेलिजेंस की आवश्यकता होती है । इस नेटवर्क में उच्च सुरक्षा अनुप्रयोग में डाटा प्रेषित किया जाता है ।

Check Also

डिजाइन टूल्स

डिजाइन टूल्स ( Design Tools ) किसी प्रोग्राम को लिखने से पहले उसके अन्तर्गत होने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *