Monday , 27 May 2019
Breaking News
Home / सामान्य ज्ञान / इतिहास (page 5)

इतिहास

शेरशाह की विजये

शेरशाह की अन्य विजयें ( Other Conquests of Sher Shah ) मुगलों को परास्त करने के पश्चात् शेरशाह ने अन्य प्रदेशों को जीतने की ओर ध्यान दिया :— पंजाब को विजय , 1541 ई० ( Conquest of Punjab , 1541 ) हुमायू पराजित होकर अपने भाई कामरान की ओर जिसके पास पंजाब का राज्य था , बढ़ा ; इसलिए शेरशाह …

Read More »

शेरशाह सूरी भारत का सम्राट कैसे बना

शेरशाह सूरी भारत का सम्राट बनना ( Emperor of India ) शेर खां ने बिहार तथा बंगाल पर अपना अधिकार कर लिया था । बंगाल का शासक एक बार तो हार गया था , परन्तु उसने पुनः 1534 ई० में शेर खां के विरुद्ध युद्ध कर दिया था । शेरखां ने उसे तेलियागढ़ी और सीकरीगढ़ी नामक स्थानों पर बुरी तरह …

Read More »

शेरशाह सूरी का शक्ति प्राप्त करना

शक्ति प्राप्त करना ( Rise to Power ) बहार खां ने शेर खां को पुनः अपने पास रख लिया । शीघ्र ही बहार खां की मृत्यु हो गई और उसकी विधवा ने शेर खां को अपने पुत्र जलाल खां का संरक्षक नियुक्त कर दिया । इसके पश्चात् जलाल खां की माता भी चल बसी और सारी शक्ति शेर खां के …

Read More »

शेरशाह सूरी की शिक्षा

शेरशाह सूरी की शिक्षा ( Education of Sher Shah Suri ) फ़रीद खां के पिता हसन खां ने चार विवाह करवाए थे । वह अपनी सब से छोटी पत्नी से बहुत प्रेम करता था । हसन अपनी सब से बड़ी पत्नी जिसका पुत्र फरीद था , को अच्छा नहीं समझता था । इसलिए बचपन में फरीद को अपनी सौतेली मां …

Read More »

शेरशाह सूरी का प्रारंभिक जीवन

Sher Shah Suri

शेरशाह सूरी का प्रारम्भिक जीवन ( Early Life Of Shershah Suri ) सूर कौन थे ? ( Who were Sur ? ) — इससे पूर्व कि शेरशाह सूरी का प्रारम्भिक जीवन दिया जाए यह जान लेना आवश्यक है कि सूर कौन थे ? सूर राजस्थान में रहने वाले एक कबीले का नाम था । ये स्वयं को मुहम्मद गौरी के वंश से …

Read More »

समुद्रगुप्त का धर्म

समुद्रगुप्त का धर्म ( Riligion of Samudra Gupta ) हिन्दू धर्म ( Hindu Religion ) समुद्रगुप्त के सिक्के उसके धर्म के सम्बन्ध में प्रकाश डालते हैं , जिनसे वह हिन्दू धर्म को मानने वाला प्रमाणित होता । वह विष्णु का पुजारी था क्योंकि उसने अश्वमेध यज्ञ किया था और ब्राह्मणों को बहुत दान दिया था ; इसलिए यह प्रमाणित होता …

Read More »

सरकार की दोहरी नीति

सरकार की दोहरी नीति ( Double policy of Government ) जब अंग्रेज सरकार ने देखा कि गर्म दल वाले सर्वप्रिय हो रहे हैं तो उन्होंने दोहरी नीति अपनाई । गर्म दल पर सरकार कठोरता करने लगी । तिलक जी को छः साल का कारावास का दण्ड दिया , लाला लाजपतराय तथा अन्य क्रांतिकारियों को भी कैद कर लिया । दूसरी …

Read More »