Thursday , 20 June 2019
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मध्य भारत

बाबर का समरकन्द को प्राप्त करना तथा खोना

बाबर का समरकन्द ( उज़्बेकिस्तान ) को प्राप्त करना तथा खोना ( Acquisition and loss of Samar kand ) समरकन्द पर अधिकार करने की बाबर की इच्छा बहुत प्रबल थी ; इसलिए उसने 1497 ई० में समरकन्द पर आक्रमण करके उस पर अधिकार कर लिया । यह स्थान उसके पूर्वज तैमूर की राजधानी थी , केवल सौ दिन के पश्चात् ही …

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बाबर के आक्रमण के समय आर्थिक और सामाजिक स्थिति

बाबर के आक्रमण के समय भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिति : आर्थिक स्थिति ( Economic Condition ) विदेशी लुटेरों को लूट – खसूट के पश्चात् भी हमारे देश में धन – धान्य का बाहुल्य था । यहां की भूमि सोना उगलती थी । यह ठीक है कि अधिक युद्ध होने के कारण फ़सलें नष्ट हो जाती थीं , परन्तु …

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बाबर के आक्रमण के समय दक्षिण भारत

बाबर के आक्रमण के समय दक्षिणी भारत की स्थिति खानदेश ( Khandesh ) खानदेश का राज्य ताप्ती की घाटी में स्थित था और चौदहवीं शताब्दी के अन्तिम दशक में ही स्वतन्त्र हो चुका था । इसके राज्य वंश का संस्थापक मलिक राजा फारूकी ( Malik Raja Faruqi ) था । उसने शान्ति पूर्वक शासन किया और 1399 ई० में उसकी …

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बाबर के भारत आक्रमण से पहले राजनीतिक स्थिति

सोलहवीं शताब्दी के आरम्भ में जब मुग़ल नेता बाबर ने आक्रमण किया तब भारतवर्ष की राजनीतिक अवस्था ग्यारहवीं शताब्दी के भारत जैसे ही थी. जिसमें मुसलमानों ने भारत पर जोरदार आक्रमण करके इस ‘ सोने की चिड़िया ‘ को अपने पिंजरे में बन्द किया था. अन्तर केवल इतना था कि उस समय भारत छोटे – छोटे हिन्दू राजाओं का समूह था जबकि …

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बाबर के आक्रमण के समय उत्तरी भारत की दशा

बाबर के भारत आक्रमण से पहले उत्तर भारत की दशा – दिल्ली ( Delhi ) दिल्ली की पुरातन भव्यता तथा शक्ति अब नहीं रही थी । बाबर के आक्रमण के समय दिल्ली पर इब्राहीम लोधी ( Ibrahim Lodhi ) शासन करता था । अभिमानी तथा क्रोधी स्वभाव के कारण उसके बहुत से सरदार उससे रुष्ट हो गए थे । उसने …

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शेरशाह सूरी की सफलता के कारण

शेरशाह सूरी की सफलता के कारण

इतिहास साक्षी है कि शेरशाह का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ । उसने अपनी योग्यता , लगन , उत्साह , बुद्धि और बाहुबल से ही अफगान राज्य स्थापित कर लिया था । उसने उस समय अफगान राज्य की स्थापना की जिस समय अफगानों की शक्ति का विनाश और मुगल शक्ति पांव जमा चुकी थी । शेरशाह ने मुगल राज्य …

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कालिंजर की विजय

कालिंजर विजय

यकालिंजर की विजय , 1545 ई० ( Conquest of Kalinjar ) अभी तक कालिंजर शेरशाह के अधीन नहीं था । शेरशाह चाहता था कि कालिंजर भी उसके अधीन हो जाए ; इसलिए 1545 ई० में कालिंजर के किले को घेर लिया । यह घेरा छः मास तक जारी रहा , परन्तु राजपूतों ने पराजय न मानी । अन्त में शेरशाह ने मिट्टी …

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