Friday , 24 May 2019
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इतिहास

अकबर की राजपूत नीति क्या थी

अकबर की राजपूत नीति क्या थी ? ( What was Rajput Policy of Akbar ? ) अकबर की राजपूत नीति का मुख्य आधार राजपूतों के साथ प्रेमपूर्ण एवं मैत्री पूर्ण व्यवहार था , जिससे ये उसके सम्पर्क में आ सके और अकबर के लिए स्वयं को भी बलिदान कर सकें । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए अकबर ने निम्नलिखित …

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अकबर की राजपूत नीति के प्रभाव

अकबर की राजपूत नीति के प्रभाव ( Effects of Akbar’s Rajput Policy ) – अकबर की राजपूत नीति के बहुत अच्छे प्रभाव हुए जिनका विवरण इस प्रकार है :- ( i ) हिन्दू – मुसलमानों में परस्पर विरोध समाप्त हो गए और दोनों जातियों में प्रेम सम्बन्ध हो गए । ( ii ) भारत मुगलों का मुकाबला करने वाली राजपूत …

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दीन-ए-इलाही के मुख्य सिद्धांत

दीन-ए-इलाही ( Chief Principles of Din – i – Ilahi ) अकबर द्वारा प्रचलित नए धर्म दीन-ए-इलाही के मुख्य सिद्धान्त निम्नलिखित थे : 1. परमात्मा एक है और सभी धर्मों के लोग उसकी दृष्टि में समान है । 2. इस धरती पर अकबर उसी परमात्मा का प्रतिनिधि है । 3. दीन-ए-इलाही के सदस्यों को आवश्यकता पड़ने पर अपनी सारी सम्पत्ति अकबर …

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अकबर की धार्मिक नीति के प्रभाव

अकबर की धार्मिक नीति के प्रभाव अकबर एक महान राजा था । वह ज्यादा पढ़ा लिखा न होने पर भी सूझ बुझ से काम लेता था । अकबर की धार्मिक नीति का लोगों पर बहुत प्रभाव पड़ा । अकबर की धार्मिक नीति के प्रभाव निम्नलिखित है – 1.हिन्दुओं तथा राजपूतों के सहयोग से अकबर ने अपने साम्राज्य में शान्ति का वातावरण स्थापित किया …

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भारत के प्रमुख वायसराय

भारत के प्रमुख वायसराय

भारत के प्रमुख वायसराय ( Chief Viceroy of India ) लॉर्ड कैनिंग ( 1856 – 1862 ई . ) ये अन्तिम गवर्नर जनरल व प्रथम वायसराय थे । इनके शासन काल में  1857 का विद्रोह , रेलों का विस्तार , कलकत्ता , बम्बई और मद्रास विश्वविद्यालयों की स्थापना ( 1857 ) , भारत में बजट पद्धति का प्रारम्भ , हाई कोटों की …

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पानीपत की दूसरी लड़ाई

पानीपत की दूसरी लड़ाई, 1556 ( The Second Battle of Panipat )  प्रमुख कारण ( Main Cause of Second Battle of Panipat ) पानीपत की दूसरी लड़ाई का मुख्य कारण तो यह था कि बंगाल के बादशाह आदिल शाह के प्रधानमन्त्री हेमू ने दिल्ली तथा आगरा के गवर्नर उज्बेग और तारदी बेग को भगा कर स्वयं दिल्ली व आगरा पर …

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राष्ट्रीय भावना का विकास

राष्ट्रीय भावना का विकास ( Development of the Spirit of Nationalism ) भगवान् शंकराचार्य ने भारत के चारों सुदूर कोनों में चार मठों की स्थापना की । उत्तर में बद्रीनाथ तो दक्षिण में रामेश्वरम् , पूर्व में जगन्नाथ पुरी तथा पश्चिम में द्वारिका मठ । इन्होंने यह भी प्रतिपादित किया कि प्रत्येक हिन्दू को इन चार मठों की यात्रा करनी …

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