Monday , 22 July 2019
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भारतीय कला एवं संस्कृति

कला एवं संस्कृति : एक परिचय

सामाजिक प्राणी होने के कारण मानव समाज की एक विशिष्ट कला एवं संस्कृति होती है । कला एवं संस्कृति में परस्पर पूरक सम्बन्ध होता है तथा इनके अवयव स्पष्ट रूप विभाजित नहीं किए जा सकते । फिर भी कला के अन्तर्गत नृत्य , गीत – संगीत , वास्तुकला, चित्रकला , नाट्यकला एवं साहित्य आते हैं तथा संस्कृति के अन्तर्गत धार्मिक मान्यताएँ एवं विश्वास , रहन – सहन , खान – पान , वस्त्राभूषण आदि को शामिल किया जाता है ।

यह आवश्यक नहीं है कि एक देश में समान कला एवं संस्कृति व्याप्त हो । एक ही देश में विभिन्न प्रकार की कलाएँ एवं संस्कृतियाँ व्याप्त हो सकती हैं , फिर भी इन विविधताओं के मध्य कुछ बिन्दु ऐसे होते हैं , जो इनको एकता के सूत्र में बाँधते हैं । ये सूत्र राष्ट्र में विविधता में एकता या अनेकता में एकता स्थापित करते हैं । भारतवर्ष इसका जीवन्त उदाहरण है ।

भारतीय कला एवं भारतीय संस्कृति

भारतीय कला कला , मानव मन की भावनाओं , संवेदनाओं या विचारों को अभिव्यक्त करने का एक माध्यम है । कला के अन्तर्गत मानव भावनाओं या विचारों को व्यवस्थित रूप में अभिव्यक्त किया जाता है , क्योकि अव्यवस्थित भावाभिव्यक्ति कभी भी कला के रूप में प्रतिष्ठित नही हो सकती है और न ही किसी दर्शक को प्रभावित कर सकती है …

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