Tuesday , 16 July 2019
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स्त्री केसर

पुंकेसर के मध्य स्त्री केसर पाया जाता है । नारी जननेन्द्रिय को स्त्री केसर या पिस्टिल अथवा जायांग ( Gynoecium ) कहते हैं । स्त्री केसर एक या अनेक अंडयो ( Carpels ) का बना होता है । स्त्री केसर के भिन्न – भिन्न भाग इस प्रकार हैं ।

स्त्री केसर

1 . वतकाग्र ( Stigma ) — स्त्री केसर के सिरे पर टोपी सी होती है जिसे वर्तिकाग्र कहते हैं । इसमें एक प्रकार का लिसलिसा पदार्थ निकलता रहता है जिससे परागकण आकर इस पर चिपक जाते हैं ।

2 . वतका ( Style ) — यह एक लम्बी नली है जो वर्तिकाग्र को ऊपर उठाए रखती है । इसमें से होते हुए परागकण अण्डाशय में पहुंचते हैं ।

3 . अण्डाशय ( Ovary ) — स्त्री केसर में सब से नीचे प्राय : फूला हुआ भाग अण्डाशय कहलाता है । अण्डाशय में छोटे छोटे अण्डाणु या बीजाण्ड (Ovules) होते हैं। परागकण या मेलगैमीट न्युक्लियाई , अण्डाशय में पहुंचकर बीजाण्ड से मिलते हैं । यह बीजाण्ड बाद में बीज बन जाते हैं ।

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