Tuesday , 21 May 2019
Breaking News
Home / कृषि विज्ञान / अपस्थानिक जड़

अपस्थानिक जड़

अपस्थानिक जड़े ( Adventitious Root )

अपस्थानिक जड़े वह जड़े हैं जो प्राथमिक जड़ , उनकी सहायक जड़ों के स्थान पर या पौधे के किसी भाग से जैसे शाखाएं , पत्ते , पर्वसन्धि से निकले उनको अपस्थानिक जड़ कहते हैं । इस प्रकार की जड़े एक बीज पत्री ( Monocotyledons ) पौधों में पाई जाती हैं ।

अपस्थानिक जड़े निम्न प्रकार की होती हैं :-

कंदिल जड़े ( Tuberous Root )

कंदिल जड़े

यह फूली हुई जड़े हैं जिनकी कोई अपनी आकृति नहीं होती । यह जड़े गुच्छे में न निकलकर एक – एक निकलती हैं । इस प्रकार की जड़े शकरकंद में पाई जाती हैं ।

फैसी कुलेटेड जड़ ( Fasciculated Root )

यह जड़े कंदिल जड़ों से मिलती – जुलती है । फैंसीकुलेटेड जड़े तने के आधार से गुच्छों के रूप में निकलती हैं । गुच्छों में मिलने वाली इस प्रकार की कंदिल जड़ों को फसीकुलेटेड जड़े कहते हैं । उदाहरणतया एसप्रागस , डेहलिया , रुलिया ।

नोडुलोज जड़े ( Nodulose Roots )

जब लम्बी पतली जड़े सिरे पर एकदम मोटी हो जाएं तो यह जड़े नोडुलोज कहलाती हैं जैसे मैन्गो जीन्जर में ।

माला रूपी जड़े ( Moniliform Roots )

यह जड़े मोतियों के समान बीच में मोटी हो जाती हैं । इस प्रकार की जड़े पालक , करेला और कुछ घासों में पाई जाती हैं ।

अनुलेटिड जड़ ( Annulated Roots )

इस प्रकार की जड़े ( Epicac ) पौधे में पाई जाती हैं जो दवाईयों में प्रयुक्त किया जाता है । इसकी जड़े ऐसे प्रतीत होती हैं कि लगातार कई छल्लों को जोड़ दिया हो ।

अवस्तम्भ मूल ( Prop Roots )

बरगद , रबर आदि वृक्षों की शाखाओं से जगह – जगह जटाएं निकली दिखाई देती हैं । वास्तव में यह अवस्थानिक जड़े हैं इनको कभी – कभी हवाई जड़े भी कहते हैं । यह जड़े बढ़ते – बढ़ते भूमि में घुस जाती हैं और धीरे – धीरे मोटी तथा मजबूत हो जाती हैं इस प्रकार यह पौधे की विशाल काय शाखाओं को सहारा प्रदान करती हैं । इसके अतिरिक्त यह भूमि से खुराक लेकर पौधे में पहुंचाने का भी कार्य करती हैं ।

जटा जड़ ( Stilt Root )

इस प्रकार की जड़े गन्ना , ज्वार , बाजरा , मकई आदि पौधों की गांठों से निकल कर जमीन में घुस जाती हैं और पौधे को सीधा खड़ा रखने में सहायता देती हैं । यह जड़े जमीन के साथ वाली पहली या दुसरी गांठों से ही निकलती हैं ।

आरोही जड़ ( Climbing Root )

प्रकृति ने कुछ एक बेलों को ऊपर चढ़ने के लिए आरोही जड़े प्रदान की हैं । इस प्रकार की जड़े टिकोमा , बीटल बेल में देखने को मिलती हैं ।

परजीवी जड़ ( Parasitic Root )

अमर बेल की अपनी कोई जमीन में जड़े नहीं होतीं लेकिन यदि इसको किसी वृक्ष या पौधे पर डाल दिया जाये तो उससे भोज्य पदार्थ लेकर जिन्दा रहती है । इसमें एक प्रकार की परजीवी जड़े होती हैं जो परपाषी ( Host ) पौधे के तनों या शाखाओं में घुस कर पानी और बना बनाया भोजन सोखा करती हैं । इसीलिए इन्हें परजीवी जड़े या चूषकांग ( Haustoria ) कहते हैं ।

नौडयूलेटिड ( Nodulated ) या नाईट्रेट बनाने वाली जड़े

चना , मटर , मूंगफली के पौधों की जड़ों में अनेक फूली हुई गांठे होती हैं जिन्हें जीवाण्विक ग्रंथिकाएं ( Bacterial Nodules ) कहते हैं । इनमें हवा की नाइट्रोजन को सोख कर भूमि में मिलाने की क्षमता होती है । यह इस नाइट्रोजन को नाइट्रेट में बदल देती है जो बाद में पौधे अपने भोजन के रूप में भूमि से लेते रहते हैं । इसलिए फली वाली फसल के पश्चात् अधिक नाइट्रोजन चाहने वाली फसल बोनी चाहिए । फली वाली फसल बोने से जमीन अधिक उपजाऊ हो जाती है । आमतौर पर ग्वारा तथा सनई की हरी खाद नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए खेत में प्रयुक्त की जाती हैं ।

श्वसन जड़ ( Respiratory Root )

पानी के कुछ पौधों में अपस्थानिक जड़े निकल आती हैं । जो हल्की तथा रंग रहित होती हैं तथा श्वसन में सहायता देती हैं । इस प्रकार की जड़े जो श्वसन में सहायता देती हैं श्वसन जड़े कहलाती हैं ।

नदी के मुहानों के आस – पास में दलदल में उगने वाले वृक्षों में एक प्रकार की जड़े भूमि की सतह के ऊपर खूटों के रूप में निकली हुई दिखाई देती हैं । यह जड़े स्पज की भांति छिद्रयुक्त होती हैं । दलदल की भूमि में वायु की कमी को यह श्वसन मूल या न्यूमैटोफोर ( Pneumatsphores ) वायुमण्डल की हवा से आक्सीजन सोख कर बनाए रखती है ।

पत्रमूल ( Leaf Roots )

कुछ पौधे ऐसे हैं जिनकी पत्तियां जब नर्म मिट्टी पर गिर जाएं तो उनके फलक के कटे हुए किनारों से छोटी – छोटी जड़े निकल आती हैं । यह अपस्थानिक पत्र मूल हैं । इस प्रकार एक पत्ते से एक नया पौधा बन जाता है । इस प्रकार की जड़ अजुबे ( Bryophyllum ) के पौधे की जड़ों में पाई जाती हैं ।

भोजन बनाने वाली जड़ें ( Assimilatory Roots )

कभी – कभी जड़े भूमि से बाहर निकल आती हैं और सूर्य के प्रकाश में हरी हो जाती हैं । यह हरी जड़ भोजन बनाने में सहायता देती हैं ।

Check Also

Types of Irrigation in India

भारत में सिंचाई के प्रकार

उपरोक्त स्रोतों से जो पानी मिलता है उसको खेत तक भिन्न – भिन्न ढंगों से …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *