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फूलदार पौधों के भाग

फूलदार पौधे

एक पौधे के अनेक भाग होते हैं । यह भाग पौधे की बढ़ौतरी तथा दूसरे आवश्यक कार्यों के लिए बहुत जरूरी हैं । पौधे के भिन्न – भिन्न भागों की जानकारी प्राप्त करने के लिए , कोई फूलदार सरसों या सूरजमुखी का पौधा लो ।

फूलदार पौधा

जड़

जड़ पौधे का वह भाग है जो ज़मीन में रहता है । इस पर पर्व , पर्वसन्धि , कूलिका या पत्तियां नहीं होतीं । आमतौर पर यह भूरे रंग की होती हैं । जड़ में एक प्राथमिक जड़ होती है जो काफी मोटी तथा सीधे जमीन में दूर तक चली जाती है । प्राथमिक जड़ से द्वितीय जड़ निकलती है तथा द्वितीय जड़ों पर तृतीय जड़े मिलती हैं । तृतीय जड़ों पर छोटे – छोटे धागे जैसे तन्तु दिखाई पड़ते हैं जिनको मूल रोम कहा जाता है । मूल रोम भूमि में से जल चूस कर , पूरे पौधे में पहुंचाते हैं । प्राथमिक , द्वितीय तथा मूल रोमों के सिरे पर मूलगोप होती है जो जड़ की आगे बढ़ने में बचाव करती हैं ।

प्रकाश संश्लेषण

तना

पौधे का भूमि से ऊपर वाला भाग तना कहलाता है । यह प्रायः हवा में सीधा खड़ा रहता है । इस पर शाखाएं , पत्ते , फूल , फल लगते हैं । आमतौर पर यह हरे रंग का होता है और इस पर पर्व , पर्वसन्धियां भी पाई जाती हैं ।

पत्ता

पर्वसन्धि से निकलने वाले पौधे के भाग को ‘ पत्ती ‘ कहते हैं । यह हरे रंग की होती हैं । अलग – अलग जाति के पेड़ पौधों में इनकी अलग – अलग आकृति होती है जिससे केवल पत्तियों को ही देख कर अधिकतर पेड़ – पौधे आसानी से पहचाने जा सकते हैं ।

फूल

वास्तव में फूल एक विशेषरूप में परिवर्तित शाखा है जो प्रजनन में सहायक है जिससे पत्तियां जनन के लिए विशेषरूप से रंग , आकार , और संरचना में बदल जाती हैं । फूलों का समूह पुष्पक्रम ( Inflorescence ) कहलाता है ।

फल

फूल में परागण , निषेचन क्रिया के बाद पंखुड़ियां झड़ जाती हैं । अण्डाशय फूल बन कर फल बन जाता था । फल निषेचित पका हुआ अण्डाशय ही है । फल में एक या अनेक बीज होते हैं । यह बीज निषेचित पके हुए अण्डाणु हैं ।

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