Monday , 22 July 2019

जड़

जड़ पौधे का वह भाग है जो मूलांकुर ( Radicle ) से निकल कर सीधा प्रकाश से दूर भूमि में पानी की तरफ बढ़ता है । जड़ों में क्लोरोफिल के अभाव से , यह मटमैले रंग की होती है । जडों में पर्वसन्धि ( Node ) , पर्व ( Internode ) का अभाव रहता है । जैसे – जैसे जड़े नीचे भूमि में बढ़ती जाती हैं , वे पतली होती जाती हैं ।

मूसला तथा अपस्थानिक जड़ों में तीन भाग दिखाई देते हैं :-

मूलकोप ( Root Cap )
जड़ के ठीक सिरे पर मूलगोप होती है । यदि इनके सिरे पर मूलगोप न होती तो वर्धन – क्षेत्र ( Region of Elongation ) की कोशिकाएं मिट्टी की रगड़ से नष्ट हो जाती हैं ।

वर्धन क्षेत्र ( Region of Elongation )
यह आमतौर पर 1 – 5 मिली – मीटर लम्बा होता है । इस क्षेत्र की कोशिकाएं लगातार विभाजित होती रहती हैं । इससे उनकी संख्या में बराबर वृद्धि होती रहती है । इस प्रकार जड़ की बढ़ोतरी इसी क्षेत्र पर निर्भर है ।

मूल रोम प्रदेश ( Root Hair Region )
यह क्षेत्र , वर्धन क्षेत्र से ऊपर रहता है । इस क्षेत्र से मूलरोम निकलते हैं जो कि पतले धागे के समान होते हैं । यह मूलरोम जमीन से भोज्य पदार्थ चूसते हैं ।

जड़ के विशिष्टगुण – जड़ों में कुछ ऐसे गुण हैं जिनके द्वारा वह तनों से पृथक की जा सकती हैं :-

  1. जड़ भूमि में नीचे जाने वाला भाग है । यह हरे रंग की नहीं होती ।
  2. प्रायः जड़ों पर कलिका ( Buds ) नहीं होतीं ।
  3. जड़ के सिरे की मूलगोप रक्षा करती है जबकि तनों के सिरे पर कलिका होती हैं ।
  4. जड़ों में एक कोशिका रोम होता है जबकि तने में बहु कोशिका रोम होते हैं ।
  5. पर्व , पर्वसन्धि केवल तनों पर ही पाई जाती है । जड़ों में इन दोनों का अभाव रहता है ।

जड़ों के भिन्न – भिन्न रूप

अधिकतर पेड़ – पौधों में दो प्रकार की जड़े मिलती हैं :-

  1. मूसला जड़ ( Tap Root )
  2. अपस्थानिक जड़े ( Adventitious Root )

Check Also

Types of Irrigation in India

भारत में सिंचाई के प्रकार

उपरोक्त स्रोतों से जो पानी मिलता है उसको खेत तक भिन्न – भिन्न ढंगों से …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *